⚖️ पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त: 5 साल से ज्यादा नहीं बढ़ सकता कार्यकाल! 🗳️
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों को लेकर एक बड़ी संवैधानिक बहस के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। 🏛️
कोर्ट ने साफ कहा है कि पंचायतों का कार्यकाल उनकी पहली बैठक से 5 साल से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता।
📅 कब खत्म हो रहा है पंचायतों का कार्यकाल?
प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल:
- 🗓️ 27 मई 2021 → पहली बैठक
- 🗓️ 26 मई 2026 → कार्यकाल समाप्त
👉 यानी संवैधानिक रूप से 26 मई 2026 के बाद पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो जाएगा।
⚠️ हाईकोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए:
- पंचायतों का कार्यकाल 5 साल से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता
- चुनाव समय पर कराना अनिवार्य है
- राज्य निर्वाचन आयोग को पूरा टाइमबाउंड चुनाव कार्यक्रम प्रस्तुत करना होगा
📌 अगली सुनवाई: 25 मार्च 2026
❓ कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से क्या पूछा?
कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से सीधा सवाल किया:
👉 क्या आप 26 मई 2026 से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं?
👉 यदि हाँ, तो पूरा टाइमलाइन प्लान कोर्ट में पेश करें
📊 देरी की वजह क्या बताई गई?
याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन ने कोर्ट में बताया:
- मतदाता सूची की तारीख बार-बार बदली गई
- अब अंतिम प्रकाशन 📅 15 अप्रैल 2026 तक कर दिया गया है
❗ ऐसे में:
- परिसीमन (Delimitation)
- आरक्षण प्रक्रिया
- मतदान
👉 इन सबको 26 मई से पहले पूरा करना लगभग असंभव हो जाएगा।
📜 संविधान क्या कहता है?
कोर्ट ने साफ किया:
- अनुच्छेद 243K के अनुसार पंचायत चुनाव कराने की पूरी जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है
- राज्य सरकार इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती
📚 कोर्ट ने प्रेम लाल पटेल केस का भी हवाला दिया, जिसमें सरकार की दखल को असंवैधानिक बताया गया था।
🏛️ सरकार का क्या रुख?
राज्य सरकार के वकील ने:
- वर्तमान कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए समय मांगा
- कोर्ट ने अगली सुनवाई तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया
👉 साथ ही कहा गया कि अगली तारीख पर
एडवोकेट जनरल या एडिशनल एडवोकेट जनरल उपस्थित रहें।
🎯 अभ्यर्थियों और जनता के लिए क्या मायने?
👉 पंचायत चुनाव में देरी होने पर संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है
👉 समय पर चुनाव नहीं हुए तो प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी
👉 कोर्ट अब पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है
🗣️ Sarkari Kalam की राय
लोकतंत्र की जड़ें गांवों में होती हैं। 🌱
अगर पंचायत चुनाव समय पर नहीं होते, तो यह सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संकट भी बन सकता है।
✍️ निष्कर्ष
हाईकोर्ट ने स्पष्ट संदेश दे दिया है —
👉 समय पर चुनाव कराओ, या जवाब दो!
अब सबकी नजरें 25 मार्च की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। 👀
📢 ऐसी ही महत्वपूर्ण अपडेट्स के लिए जुड़े रहें
सरकारी कलम (www.sarkarikalam.com) 🖊️
