पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करना पड़ा भारी, सचिवालय के अनुभाग अधिकारी द्वारिका प्रसाद बर्खास्त
📍 लखनऊ। उत्तर प्रदेश सचिवालय में तैनात एक अनुभाग अधिकारी को पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। लंबी जांच के बाद सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है।
बताया गया है कि अनुभाग अधिकारी द्वारिका प्रसाद ने अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते और बिना तलाक लिए दूसरी महिला से शादी कर ली थी। खास बात यह है कि दूसरी पत्नी भी सरकारी कर्मचारी बताई जा रही है।
📄 2015 में पहली पत्नी ने की थी शिकायत
इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी, जब पहली पत्नी ने सचिवालय प्रशासन विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पति द्वारिका प्रसाद ने बिना तलाक लिए दूसरी शादी कर ली है, जो सरकारी सेवा नियमों का उल्लंघन है।
⏳ 11 साल तक चली लंबी जांच
यह मामला करीब 11 वर्षों तक जांच के दौर से गुजरता रहा। जांच के दौरान कई तकनीकी पेच सामने आए, जिससे फैसला आने में काफी समय लग गया।
पहली जांच में शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए दूसरी पत्नी का नाम और शादी की तारीख का मिलान स्पष्ट रूप से नहीं हो सका, जिसके कारण जांच अधिकारी ने साक्ष्यों के अभाव में द्वारिका प्रसाद को आरोपों से मुक्त कर दिया था।
🔎 सेवा पुस्तिका से खुला बड़ा सुराग
बाद में सचिवालय प्रशासन विभाग ने जांच रिपोर्ट का दोबारा विश्लेषण किया। इस दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया—
- द्वारिका प्रसाद ने अपनी सेवा पुस्तिका में पहली पत्नी का नाम दर्ज कर रखा था।
- वहीं दूसरी महिला ने अपने दस्तावेजों में पति के रूप में द्वारिका प्रसाद का नाम दर्ज कराया था।
इसी आधार पर मामले को गंभीर मानते हुए आगे की कार्रवाई की गई।
⚖️ यूपी लोक सेवा आयोग से ली गई अनुमति
सरकारी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त करने से पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से अनुमति ली जाती है।
सचिवालय प्रशासन विभाग ने पिछले वर्ष आयोग से अनुमति मांगी थी, जिसके बाद अब आदेश जारी करते हुए द्वारिका प्रसाद को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
📢 ‘सरकारी कलम’ की बात
सरकारी सेवा में रहते हुए दूसरी शादी करना, जब तक पहली पत्नी से विधिवत तलाक न हो, सेवा नियमों के खिलाफ माना जाता है।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा फैसला भी सरकारी सेवा में अनुशासन और नियमों के दायरे में आता है।
लंबे समय तक चली जांच के बाद आखिरकार कार्रवाई होना यह भी दिखाता है कि सरकारी तंत्र में शिकायतों की जांच भले देर से हो, लेकिन नियमों का उल्लंघन साबित होने पर कार्रवाई तय होती है।
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