⚖️ सरकारी अस्पतालों की लापरवाही: तीसरी के छात्र को इलाज न मिलने पर सरकार को देना होगा मुआवजा

⚖️ सरकारी अस्पतालों की लापरवाही: तीसरी के छात्र को इलाज न मिलने पर सरकार को देना होगा मुआवजा

नई दिल्ली: सरकारी अस्पतालों में इलाज से इनकार करने का मामला अब सरकार पर भारी पड़ गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने तीसरी कक्षा के एक छात्र को समय पर इलाज न मिलने के मामले में दिल्ली सरकार को 12 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

अदालत ने निर्देश दिया है कि सरकार दो महीने के भीतर बच्चे को यह राशि भुगतान करे।


🧒 स्कूल में खेलते समय टूटा था हाथ

मामले के अनुसार, दिल्ली नगर निगम के स्कूल में पढ़ने वाले छात्र आदित्य के हाथ में 1 अप्रैल 2024 को स्कूल में खेलते समय फ्रैक्चर हो गया था।

घटना के बाद बच्चे को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां उसे उपचार नहीं मिला।

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🏥 दो सरकारी अस्पतालों ने लौटा दिया

याचिका के अनुसार:

  • पहले सरकारी अस्पताल ने कहा कि प्लास्टर चढ़ाने के लिए कॉटन उपलब्ध नहीं है।
  • दूसरे सरकारी अस्पताल में बताया गया कि हड्डी के डॉक्टर केवल सुबह उपलब्ध होते हैं और शाम चार बजे के बाद नहीं मिलेंगे।

इन कारणों से बच्चे को सरकारी अस्पतालों से वापस लौटा दिया गया।


🌙 निजी अस्पताल में आधी रात को मिला इलाज

सरकारी अस्पतालों से निराश होकर परिवार बच्चे को निजी अस्पताल ले गया।

वहां रात करीब 12:30 बजे जाकर बच्चे के हाथ पर प्लास्टर चढ़ाया जा सका।


⚖️ अदालत ने कहा — लापरवाही का भुगतान सरकार करेगी

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने की।

अदालत ने कहा कि:

  • बच्चा आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से है।
  • उसके पिता सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते हैं।

ऐसे में सरकारी अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार करना गंभीर लापरवाही है और इसका भुगतान सरकार को करना होगा।


📑 दो साल चली कानूनी लड़ाई

बच्चे के पिता ने यह मामला करीब दो साल तक अदालत में लड़ा

यह याचिका अशोक अग्रवाल, अधिवक्ता, द्वारा दायर की गई थी। अंततः अदालत ने बच्चे के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया।


✍️ सरकारी कलम निष्कर्ष:
यह फैसला सरकारी अस्पतालों की जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगर सरकारी अस्पताल इलाज देने में लापरवाही करते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी सरकार को उठानी पड़ेगी।

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