मध्य प्रदेश के गुना जिले में एक शिक्षक को प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अमिताभ मिश्र (सत्र न्यायाधीश) की अदालत ने शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों को दोषी करार देते हुए 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
इसके साथ ही दोनों पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
👨🏫 किन अधिकारियों को मिली सजा
न्यायालय ने जिन अधिकारियों को दोषी माना है, वे हैं:
- राजीव यादव — तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), बमोरी
- छतरसिंह लोधा — जनशिक्षक (CAC)
अदालत ने आदेश दिया कि दोनों से वसूले गए कुल 30,000 रुपये का अर्थदंड मृतक शिक्षक की पत्नी को दिया जाएगा।
📍 2023 में शिक्षक ने की थी आत्महत्या
यह मामला गुना जिले का है।
मृतक शिक्षक धर्मेंद्र सोनी:
- शासकीय प्राथमिक विद्यालय “गमरिया के टपरे” में सहायक शिक्षक थे
- 18 अप्रैल 2023 को उन्होंने स्कूल परिसर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी
इस घटना के बाद पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया था।
📝 सुसाइड नोट में किया था गंभीर खुलासा
घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में शिक्षक ने लिखा था कि:
- अधिकारी निरीक्षण के नाम पर उन्हें लगातार परेशान करते थे
- स्कूल खुला होने के बावजूद चैनल गेट बंद कर फोटो खींच लेते थे
- फिर उस फोटो के आधार पर कार्रवाई की धमकी देते थे
- उनसे 500 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की अवैध वसूली की जाती थी
मानसिक दबाव और लगातार प्रताड़ना से तंग आकर शिक्षक ने यह कदम उठा लिया।
👪 परिवार ने लगाए थे गंभीर आरोप
मृतक के माता-पिता ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि:
- दोनों अधिकारी लंबे समय से शिक्षक को
- मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे
- आर्थिक रूप से दबाव बना रहे थे
इसी प्रताड़ना से परेशान होकर शिक्षक ने आत्महत्या कर ली।
⚖️ अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयान पर विचार किया।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा:
निरीक्षण के नाम पर की जा रही अवैध वसूली ही शिक्षक की मौत की मुख्य वजह बनी। सत्य मरने वाले व्यक्ति के होंठों पर रहता है।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी किसी भी प्रकार की दया के पात्र नहीं हैं, इसलिए उन्हें सख्त सजा दी जाती है।
📢 शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस घटना ने शिक्षा विभाग में निरीक्षण के नाम पर हो रही कथित वसूली और दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि:
- अधिकारियों द्वारा अनावश्यक दबाव
- निरीक्षण के नाम पर प्रताड़ना
जैसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी शिक्षक को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
✍️ (सरकारी कलम | www.sarkarikalam.com)
