⚖️ बीएलओ हटाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज: इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मऊ जिले में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को हटाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह फैसला तब दिया जब उसे बताया गया कि संबंधित अधिकारी को पहले ही बदल दिया गया है।
📍 क्या था पूरा मामला
यह मामला मऊ जिले के रानीपुर ब्लॉक के गांव मंजीत से जुड़ा था।
याचिकाकर्ता मनीष कुमार ने जनहित याचिका दायर कर मांग की थी कि गांव में तैनात बीएलओ को पद से हटाया जाए।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि:
- संबंधित बीएलओ के खिलाफ कई बार शिकायतें की गईं
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा उन्हें हटाने के आदेश भी दिए गए थे
- इसके बावजूद वह पद पर बने हुए थे
🗳️ कोर्ट को क्या जानकारी दी गई
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि:
- संबंधित बीएलओ को पहले ही हटा दिया गया है
- उनकी जगह प्रदुमन मिश्र को नया बीएलओ नियुक्त कर दिया गया है
जब कोर्ट को यह जानकारी मिली कि याचिका का मुख्य मुद्दा पहले ही हल हो चुका है, तो अदालत ने जनहित याचिका को निरस्त (खारिज) कर दिया।
📌 बीएलओ की भूमिका क्या होती है
बीएलओ यानी Booth Level Officer चुनाव प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह अधिकारी:
- मतदाता सूची का सत्यापन करता है
- नए मतदाताओं का पंजीकरण करता है
- चुनाव से जुड़ी स्थानीय प्रक्रिया को संभालता है
आमतौर पर यह जिम्मेदारी सरकारी शिक्षक या सरकारी कर्मचारी को दी जाती है।
🧾 कोर्ट का संकेत
हाईकोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि:
- यदि प्रशासन पहले ही कार्रवाई कर चुका हो
- और विवाद का समाधान हो चुका हो
तो अदालत ऐसी जनहित याचिकाओं को आगे सुनवाई के योग्य नहीं मानती।
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