भ्रष्टाचार पर सख्ती: अब ग्रुप-C कर्मचारियों को भी देना होगा संपत्ति का पूरा ब्योरा 🚆📑

रेलवे में भ्रष्टाचार पर सख्ती: अब ग्रुप-C कर्मचारियों को भी देना होगा संपत्ति का पूरा ब्योरा 🚆📑

नई दिल्ली/प्रयागराज। भारतीय रेलवे में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए रेलवे बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। अब रेलवे के नॉन-गजटेड (अराजपत्रित) कर्मचारियों को भी अपनी अचल संपत्ति का वार्षिक रिटर्न (Property Return) दाखिल करना अनिवार्य होगा।

इस संबंध में रेलवे बोर्ड ने आरबीई 19/2026 के तहत उत्तर मध्य रेलवे सहित सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों को निर्देश जारी कर दिए हैं।


📊 किन कर्मचारियों को देना होगा संपत्ति का विवरण

नए आदेश के अनुसार:

  • ग्रुप-C कर्मचारी जिनका ग्रेड पे 4600 रुपये या उससे अधिक है
  • उन्हें अपनी और अपने परिवार के नाम पर दर्ज सभी अचल संपत्तियों का विवरण देना होगा।

इसमें शामिल होगा:

  • विरासत में मिली संपत्ति
  • खुद खरीदी गई जमीन या मकान
  • लीज या मॉर्टगेज पर ली गई संपत्ति

👨‍💼 पब्लिक डीलिंग स्टाफ भी दायरे में

रेलवे बोर्ड ने इस नियम के दायरे को और व्यापक बना दिया है। अब केवल सुपरवाइजर ही नहीं, बल्कि पब्लिक डीलिंग वाले कर्मचारी भी इसमें शामिल होंगे।

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इन पदों को भी संपत्ति का विवरण देना होगा:

  • रिजर्वेशन क्लर्क
  • बुकिंग क्लर्क
  • पार्सल क्लर्क
  • टीटीई
  • टीसी

यानी रेलवे के वे कर्मचारी जो सीधे जनता से जुड़े रहते हैं, उन्हें भी अब अपनी संपत्ति की जानकारी देनी होगी।


⚠️ नियम नहीं मानने पर हो सकती है कार्रवाई

रेलवे बोर्ड की निदेशक (स्थापना) प्रिया गोपाल कृष्णन द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि अभी तक कई कर्मचारी संपत्ति विवरण जमा करने के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहे थे।

इसी वजह से सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि:

✔ कर्मचारियों से तय प्रारूप में संपत्ति का रिटर्न जमा कराया जाए
✔ नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है


🗣️ उत्तर मध्य रेलवे का क्या कहना है

उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी के अनुसार,

रेलवे बोर्ड के निर्देशों का जोन में पूरी तरह पालन किया जाएगा। इससे रेलवे प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।


📌 क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला

रेलवे देश का सबसे बड़ा सरकारी विभागों में से एक है, जहां लाखों कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में यह कदम कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इससे:

✔ भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
✔ कर्मचारियों की संपत्ति पर निगरानी
✔ प्रशासन में पारदर्शिता
✔ जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद


✍️ सरकारी कलम की नजर:
रेलवे बोर्ड का यह फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि नियमों का सख्ती से पालन हुआ तो रेलवे जैसे विशाल तंत्र में भ्रष्टाचार पर काफी हद तक अंकुश लग सकता है।


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