⚖️ संसद संप्रभु है, अदालत में दिए वचन से बंधी नहीं: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

⚖️ संसद संप्रभु है, अदालत में दिए वचन से बंधी नहीं: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संसद एक संप्रभु विधायी निकाय है और कानून बनाना उसका विशेषाधिकार है। संसद केंद्र सरकार की ओर से अदालत के समक्ष दिए गए किसी भी वचन से बाध्य नहीं है।


📚 किस मामले पर हुई सुनवाई?

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

धारा 152 भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है।


🏛️ याचिकाकर्ताओं का तर्क

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि—

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  • बीएनएस की धारा 152, पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124ए (राजद्रोह) को नए रूप में पुनः लागू करती है।
  • मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने राजद्रोह कानून पर रोक लगाई थी और केंद्र को इसकी समीक्षा करने का निर्देश दिया था।
  • अदालत में दिए गए आश्वासन के बाद सरकार उसी प्रावधान को नए कानून में पुनः शामिल नहीं कर सकती।

📑 धारा 173 पर भी उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 का हवाला देते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी फैसले का उल्लंघन करती है।

🔹 ललिता कुमारी फैसले में कहा गया था कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
🔹 जबकि धारा 173 में प्रावधान है कि पुलिस पहले यह जांच करेगी कि प्रथमदृष्टया मामला बनता है या नहीं।


🗣️ सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का महत्व

पीठ ने स्पष्ट किया कि—
👉 संसद की विधायी शक्तियां स्वतंत्र हैं।
👉 अदालत के समक्ष कार्यपालिका द्वारा दिया गया आश्वासन संसद को बाध्य नहीं कर सकता।

यह टिप्पणी विधायिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के संतुलन (Separation of Powers) के सिद्धांत को रेखांकित करती है।


✍️ सरकारी कलम की राय

यह मामला केवल एक धारा की वैधता का नहीं, बल्कि—

  • संसद की विधायी संप्रभुता
  • न्यायपालिका की समीक्षा शक्ति
  • नागरिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी

जैसे मूल संवैधानिक सिद्धांतों से जुड़ा है।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला देश की आपराधिक न्याय प्रणाली और नागरिक अधिकारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सरकारी कलम संविधान और न्याय से जुड़े हर बड़े मुद्दे पर निष्पक्ष जानकारी आप तक पहुंचाता रहेगा। 📰✨

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