⚖️ शुआट्स शिक्षक मामला: हाईकोर्ट का सहानुभूतिपूर्ण रुख, नियुक्ति सुरक्षा या मुआवजे पर विचार के निर्देश
Allahabad High Court ने नैनी स्थित Sam Higginbottom University of Agriculture, Technology and Sciences (शुआट्स) में एक दशक से अधिक समय तक पढ़ाने वाले 51 शिक्षकों के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है।
न्यायालय ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि वह शिक्षकों की नियुक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की योजना प्रस्तुत करे। यदि परिस्थितियां अनुकूल न हों, तो:
- 📘 किसी अन्य पाठ्यक्रम में समायोजन
- 💰 या एकमुश्त मुआवजा देने के विकल्प
पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए, ताकि शिक्षक अपना भविष्य सुरक्षित कर सकें।
👨⚖️ क्या कहा कोर्ट ने?
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने 51 शिक्षकों की याचिकाओं और शुआट्स की याचिका को एक साथ निस्तारित करते हुए दिया।
हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्स बंद करने का विश्वविद्यालय का निर्णय नियमानुसार प्रतीत होता है।
कोर्ट ने कहा:
- विश्वविद्यालय के निर्णय पर रोक लगाने संबंधी राज्य के निर्देशों में हस्तक्षेप का कारण नहीं है।
- फिर भी राज्य सरकार इस विषय में नया निर्णय ले।
- शुआट्स तीन सप्ताह में राज्य सरकार के समक्ष स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे।
- राज्य सरकार उसके बाद तीन सप्ताह में अंतिम निर्णय ले।
🏛️ पृष्ठभूमि क्या है?
- 28 मार्च 2025 को शुआट्स की सीनेट ने 53 शिक्षकों को हटाने का आदेश जारी किया था।
- राज्य सरकार ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।
- विश्वविद्यालय ने राज्य के इस हस्तक्षेप को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
इसी दौरान 51 शिक्षकों ने भी याचिकाएं दाखिल कर मांग की कि उन्हें ग्रांट-इन-एड पदों में समायोजित कर सेवा सुरक्षा दी जाए।
हाल ही में जारी शासनादेश में कहा गया था कि स्ववित्तपोषित श्रेणी के 53 शिक्षकों से अंतिम निर्णय तक कार्य लिया जाएगा और वेतन का भुगतान भी किया जाएगा।
📢 शिक्षकों का पक्ष
याचिकाकर्ता शिक्षकों का आरोप है कि:
- प्रक्रियाओं की अनदेखी कर सेवा से हटाया गया
- वर्षों की सेवा के बावजूद भविष्य असुरक्षित कर दिया गया
कोर्ट ने इस मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय और राज्य सरकार दोनों के लिए मुआवजा या समायोजन का रास्ता खुला रखा है।
✍️ सरकारी कलम की टिप्पणी
यह फैसला शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।
📌 एक ओर विश्वविद्यालय को शैक्षणिक और प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है।
📌 दूसरी ओर वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की आजीविका और भविष्य की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
हाईकोर्ट का संतुलित रुख यह दर्शाता है कि कानूनी वैधता के साथ मानवीय संवेदनशीलता भी जरूरी है।
सरकारी कलम इस मामले की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए है और आपको हर अपडेट से अवगत कराता रहेगा। 📚⚖️
