⚖️ मृतक आश्रित कोटे में शिक्षक भर्ती पर बड़ी राहत – खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर लगाई रोक
प्रयागराज/मेरठ। मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में Allahabad High Court की खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने सहानुभूति के आधार पर नियुक्ति देने के एकल पीठ के आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एस.डी. सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की पीठ ने मेरठ निवासी अनिरुद्ध यादव की विशेष अपील पर दिया।
📌 क्या है पूरा मामला?
मामला मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति से जुड़ा है। एकल पीठ ने सहानुभूति के आधार पर नियुक्ति देने का आदेश दिया था, जिसे विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी गई।
अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता शिवम यादव एवं हिमांशु बंसल ने तर्क रखा कि—
📜 चार सितंबर 2000 और 15 फरवरी 2013 के शासनादेशों (Government Orders) को उनकी विधिक वैधता पर स्पष्ट एवं प्रत्यक्ष चुनौती दिए बिना असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता।
⚖️ खंडपीठ ने क्या कहा?
खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि—
- किसी भी वैधानिक नियम या शासनादेश को तब तक असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता,
- जब तक उसकी विधिक वैधता को विधिवत चुनौती न दी गई हो।
इसी आधार पर एकल पीठ के आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई।
🎯 शिक्षक भर्ती पर क्या असर?
इस अंतरिम आदेश के बाद—
✅ मृतक आश्रित कोटे में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया पर लगा अवरोध हट गया।
✅ शासनादेशों की वैधता बरकरार मानी गई है, जब तक उन्हें औपचारिक रूप से चुनौती नहीं दी जाती।
✅ नियुक्ति प्रक्रिया फिलहाल पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रह सकेगी।
🏫 सरकारी कलम की टिप्पणी
“सरकारी कलम” का मानना है कि यह निर्णय विधिक प्रक्रिया की मूल भावना को स्पष्ट करता है। अदालत ने यह संदेश दिया है कि—
⚖️ कानून के किसी प्रावधान को असंवैधानिक ठहराने के लिए विधिवत कानूनी चुनौती आवश्यक है।
शिक्षकों और अभ्यर्थियों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भर्ती प्रक्रिया में स्थिरता बनी रहेगी।
📍 निष्कर्ष
Allahabad High Court के इस अंतरिम आदेश से मृतक आश्रित कोटे में शिक्षक भर्ती का रास्ता फिलहाल साफ हो गया है। अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई में आएगा, लेकिन अभी के लिए शासनादेश प्रभावी रहेंगे।
✍️ लेख: सरकारी कलम टीम
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