⚖️ अनुकंपा नियुक्ति पर हाई कोर्ट का अहम आदेश: “विशेष परिस्थितियों में सरकार दे सकती है राहत” 👩‍⚖️

⚖️ अनुकंपा नियुक्ति पर हाई कोर्ट का अहम आदेश: “विशेष परिस्थितियों में सरकार दे सकती है राहत” 👩‍⚖️

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक संवेदनशील मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि राज्य सरकार को नियम 10 के तहत कठिनाइयों को दूर करने का अधिकार है और विशेष परिस्थितियों में वह विशेष आदेश पारित कर सकती है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने बलिया निवासी राजकुमारी देवी की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए दिया।


👧 9 वर्षीय बच्ची का मामला, कोर्ट ने सरकार को दिया एक सप्ताह का समय

खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि नौ वर्षीय सौम्या उर्फ साक्षी के मामले में सप्ताह भर के भीतर बिना किसी तकनीकी आपत्ति के मेरिट पर निर्णय पारित किया जाए।

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📌 क्या है पूरा मामला?

  • शैलेंद्र कुमार भारती प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक थे।
  • 7 जून 2018 को सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया।
  • 10 जुलाई 2018 को उनकी पत्नी शशिलता का भी देहांत हो गया।
  • पीछे रह गई मात्र ढाई वर्षीय बेटी सौम्या उर्फ साक्षी

बच्ची की देखभाल उसके चाचा रमेश चंद्र सक्सेना और चाची राजकुमारी देवी कर रहे हैं।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ने 3 मार्च 2021 को चाची को विधिवत अभिभावक नियुक्त किया।

चाची राजकुमारी देवी ने बच्ची के हित में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 13 नवंबर 2025 को यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि वह “परिवार” की परिभाषा में नहीं आतीं।


🏛️ कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा—

  • नियम 10 के तहत राज्य सरकार को कठिनाइयों को दूर करने का अधिकार प्राप्त है।
  • विशेष परिस्थितियों में सरकार विशेष आदेश पारित कर सकती है।
  • अनाथ बच्ची के हित को प्राथमिकता देते हुए मामले पर संवेदनशीलता से विचार होना चाहिए।

✍️ सरकारी कलम की बात

अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य ही यही है कि अचानक संकट में फंसे परिवार को सहारा मिल सके
जब माता-पिता दोनों का निधन हो चुका हो और बच्ची नाबालिग हो, तो तकनीकी आधार पर आवेदन खारिज करना न्यायोचित नहीं कहा जा सकता।

हाई कोर्ट का यह आदेश प्रशासन को याद दिलाता है कि कानून का उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना के साथ न्याय करना भी है।

📢 शिक्षा और कर्मचारियों से जुड़े हर महत्वपूर्ण फैसले के लिए जुड़े रहें सरकारी कलम के साथ।

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