⚡ 151 विद्यालयों में दो साल से बिजली कनेक्शन लंबित, सीडीओ ने जताई कड़ी नाराजगी 🔎

⚡ 151 विद्यालयों में दो साल से बिजली कनेक्शन लंबित, सीडीओ ने जताई कड़ी नाराजगी 🔎

प्रयागराज। विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां उपभोक्ताओं को मामूली बकाया पर बार-बार कॉल किए जाते हैं, वहीं जिले के 151 विद्यालयों में 2023 से पैसा जमा होने के बावजूद अब तक बिजली कनेक्शन नहीं दिया गया

मामला सामने आने पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) हर्षिका सिंह ने समीक्षा बैठक में संबंधित एक्सईएन पर कड़ी नाराजगी जताई और नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए।


💰 करोड़ों रुपये आवंटित, फिर भी काम अधूरा

संगम सभागार में हुई बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि—

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  • शिक्षा निदेशक, लखनऊ द्वारा वर्ष 2023 में 218 विद्यालयों में विद्युत संयोजन के लिए
    ₹3 करोड़ 82 हजार 207 की धनराशि आवंटित की गई।
  • 205 विद्यालयों ने झटपट पोर्टल के माध्यम से विद्युत वितरण खंड को भुगतान भी कर दिया।
  • इसके बावजूद अब तक केवल 54 विद्यालयों में ही कनेक्शन दिया गया
  • शेष 151 विद्यालय आज भी बिजली से वंचित हैं।

सीडीओ ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित एक्सईएन को नोटिस जारी किया।


🏫 शिक्षा व्यवस्था पर असर

बिजली के बिना विद्यालयों में—

  • पंखे, लाइट और कंप्यूटर नहीं चल पा रहे
  • डिजिटल शिक्षा प्रभावित हो रही
  • बच्चों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा

यह स्थिति तब है जब सरकार डिजिटल और स्मार्ट क्लास की बात कर रही है।


📌 अन्य निर्देश भी जारी

बैठक में सीडीओ ने—

  • निर्माणाधीन विद्यालयों में अवशेष कार्य गुणवत्ता के साथ पूरा कराने के निर्देश दिए।
  • बैठक से अनुपस्थित बीईओ से स्पष्टीकरण लेने को कहा।
  • कोरांव, होलागढ़ और धनुपूर में निपुण भारत मिशन के तहत निपुण प्लस ऐप पर कम फीडिंग पाए जाने पर जवाब तलब किया।
  • चाका में आधारविहीन बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र के लंबित मामलों पर भी नाराजगी जताई।

बैठक में बीएसए अनिल कुमार भी मौजूद रहे।


✍️ सरकारी कलम की बात

जब विद्यालयों ने निर्धारित प्रक्रिया से भुगतान कर दिया, तो दो वर्ष तक कनेक्शन लंबित रहना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही दर्शाता है।

यदि आम उपभोक्ता से समय पर बिल वसूला जाता है, तो विभाग को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
बिजली जैसी बुनियादी सुविधा में देरी सीधे बच्चों की शिक्षा पर असर डालती है।

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