⚖️ मिड-डे मील रिकवरी पर हाईकोर्ट सख्त: राज्यपाल की मंजूरी बिना कार्रवाई नहीं ❗
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिड-डे मील योजना में कथित गबन के आरोपी एक सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ जारी ₹11.14 लाख की रिकवरी का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राज्यपाल की अनुमति के बिना सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने पारित किया।
🧑🏫 क्या है मामला?
मामला बागपत के सर्वोदय मंदिर इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त कौशिक से जुड़ा है।
- आरोप था कि कोरोना काल (2019–2022) में मिड-डे मील/पीएम पोषण योजना के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ता और खाद्यान्न में लगभग ₹11 लाख का गबन हुआ।
- विभाग ने आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर उनकी पेंशन से वसूली का आदेश जारी कर दिया।
- याची 2021 में सेवानिवृत्त हो चुके थे।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि सिविल सेवा नियमावली के अनुच्छेद 351-ए के तहत सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी कार्रवाई के लिए राज्यपाल की विधिसम्मत मंजूरी अनिवार्य है।
कोर्ट ने माना कि विभाग ने केवल विशेष सचिव के पत्र को मंजूरी मानकर कार्रवाई की, जो विधिसम्मत नहीं है।
साथ ही, अदालत ने कहा कि पूर्व में की गई जांच सिर्फ फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट थी, इसे पूर्ण अनुशासनात्मक जांच नहीं माना जा सकता।
🧾 कोर्ट का स्पष्ट संदेश
- सेवानिवृत्ति के बाद कार्रवाई के लिए राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक।
- बिना विधिवत चार्जशीट और अनुशासनात्मक प्रक्रिया के पेंशन से कटौती नहीं।
- केवल आंतरिक रिपोर्ट के आधार पर रिकवरी आदेश असंगत।
🚨 नाबालिग से फर्जी आधार बनवाकर एग डोनेशन: जमानत अर्जी खारिज
प्रयागराज। जिला अदालत ने नाबालिग से फर्जी आधार बनवाकर एग डोनेशन कराने के आरोप में गिरफ्तार महिला की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी प्रथम) ने सुनाया।
मामले में फाफामऊ थाने में 6 फरवरी 2026 को आपराधिक साजिश, अपहरण सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
📌 आरोप क्या हैं?
- नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाना
- कथित धर्म परिवर्तन
- फर्जी आधार कार्ड बनवाना
- पैसों के लालच में एग डोनेशन कराना
पीड़िता के बयान के अनुसार, वह शादी समारोह में वेटर का काम करती थी, जहां सह-अभियुक्ताओं से मुलाकात हुई। बाद में उसे एग डोनेशन के नाम पर सेंटर ले जाकर इंजेक्शन देकर अंडाणु निकाले गए।
✍️ सरकारी कलम की बात
पहला मामला बताता है कि प्रशासनिक कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, वहीं दूसरा मामला समाज में बढ़ते अपराध और मानव तस्करी जैसी गंभीर चुनौतियों की ओर संकेत करता है।
न्यायपालिका के सख्त रुख से एक ओर कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित होते हैं, तो दूसरी ओर अपराधियों पर कानून का शिकंजा कसता है।
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