⚖️ बुंदेलखंड का विरलतम अपराध: 34 मासूमों के शोषण पर मृत्युदंड

⚖️ बुंदेलखंड का विरलतम अपराध: 34 मासूमों के शोषण पर मृत्युदंड

बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर जिलों में 34 बच्चों के यौन शोषण, अश्लील फोटो और पोर्न वीडियो बनाने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने सख्ततम फैसला सुनाया है।

विशेष पॉक्सो न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने दोषी जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने 163 पृष्ठों के निर्णय में इस अपराध को “विरल से विरलतम” श्रेणी में माना।


📌 क्या है पूरा मामला?

  • वर्ष 2020 में इंटरपोल से सूचना मिलने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मामले की जांच शुरू की।
  • एक पेन ड्राइव में 34 बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो और 679 अश्लील तस्वीरें मिलीं।
  • 31 अक्टूबर 2020 को नई दिल्ली में केस दर्ज हुआ।
  • जांच में सामने आया कि बांदा के नरैनी क्षेत्र का निवासी रामभवन अपने साथियों के साथ बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर के बच्चों का शोषण कर रहा था।

⚖️ अदालत का फैसला

  • दोनों दोषियों को मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाए जाने का आदेश।
  • रामभवन पर ₹6.45 लाख और दुर्गावती पर ₹5.40 लाख का जुर्माना।
  • जुर्माने की राशि में से प्रत्येक पीड़ित बच्चे (साक्ष्य/गवाह के रूप में उपस्थित) को ₹1-1 लाख की क्षतिपूर्ति।
  • राज्य और केंद्र सरकार को पीड़ित परिवारों को ₹10-10 लाख की सहायता राशि देने का निर्देश।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह अपराध केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ जघन्य कृत्य है, जिसने मासूम बच्चों के मानसिक और सामाजिक जीवन पर गहरा घाव छोड़ा है।

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🛑 समाज के लिए बड़ा संदेश

यह फैसला कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है—

1️⃣ बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर शून्य सहनशीलता
2️⃣ जांच एजेंसियों की अंतरराष्ट्रीय समन्वय क्षमता (इंटरपोल सूचना)।
3️⃣ पीड़ितों को आर्थिक और कानूनी संरक्षण।

बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और राज्य की जिम्मेदारी है।


🧠 बाल सुरक्षा पर जरूरी कदम

✔️ अभिभावक बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर सतर्क नजर रखें।
✔️ स्कूलों में ‘गुड टच-बैड टच’ की नियमित शिक्षा दी जाए।
✔️ किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस या बाल संरक्षण इकाई को सूचना दें।
✔️ बच्चों से खुलकर संवाद करें ताकि वे भयमुक्त होकर अपनी बात कह सकें।


✍️ सरकारी कलम की टिप्पणी

बुंदेलखंड का यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज को झकझोर देने वाला सच है। अदालत का कठोर निर्णय यह स्पष्ट करता है कि मासूमों के साथ हैवानियत करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं।

बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।


📞 यदि कोई बच्चा या परिवार ऐसे किसी अपराध का शिकार हो, तो तुरंत 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन) या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।

✍️ सरकारी कलम
न्याय, संवेदना और समाज के पक्ष में

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