🩸📚 एनीमिया मुक्त उत्तर प्रदेश: योगी सरकार चलाएगी बड़ा अभियान, स्कूलों से पंचायत तक पहुंचेगी मुहिम
प्रदेश में एनीमिया के खिलाफ अब निर्णायक लड़ाई शुरू होने जा रही है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार “एनीमिया मुक्त कक्षा”, “एनीमिया मुक्त विद्यालय” और “एनीमिया मुक्त पंचायत” जैसी नई पहलों के साथ व्यापक अभियान चलाने जा रही है।
यह मुहिम जिला प्रशासन के सहयोग से चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी।
🎯 क्या है सरकार की योजना?
✔️ स्कूलों में विशेष टीमें भेजी जाएंगी
✔️ बच्चों और किशोरियों की जांच व जागरूकता अभियान
✔️ पंचायत स्तर तक अभियान का विस्तार
✔️ सोशल मीडिया पर जागरूकता कार्यक्रम
✔️ शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कई विभागों की सहभागिता
सरकार का उद्देश्य है कि समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जाए और एनीमिया के खिलाफ सामूहिक प्रयास किया जाए।
👩⚕️ किन पर है सबसे ज्यादा फोकस?
एनीमिया का सीधा प्रभाव—
- महिलाओं
- गर्भवती माताओं
- शिशुओं
- बच्चों
- किशोरियों
पर पड़ता है।
बच्चों और किशोरों के शैक्षणिक प्रदर्शन व कार्यक्षमता में सुधार के लिए स्कूल कैंपस में विशेष जागरूकता मुहिम चलाई जाएगी।
💻 डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम होगा मजबूत
एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत प्रदेश में एक समग्र डिजिटल रिपोर्टिंग प्रणाली विकसित की जाएगी।
इससे—
📌 सभी आयु वर्ग के लाभार्थियों की जांच
📌 उपचार की निगरानी
📌 फॉलो-अप की समयबद्ध ट्रैकिंग
सुनिश्चित की जा सकेगी।
राज्य स्तरीय टास्क फोर्स ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।
🏫 चरणबद्ध तरीके से होगी शुरुआत
“एनीमिया मुक्त कक्षा”, “एनीमिया मुक्त विद्यालय” और “एनीमिया मुक्त पंचायत” की पहल पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।
अलग-अलग विभागों के अधिकारी व कर्मचारी टीम के सदस्य बनेंगे और स्कूलों में जाकर जागरूकता की अलख जगाएंगे।
सरकार का लक्ष्य है कि विद्यालय स्तर पर ही एनीमिया की पहचान और रोकथाम सुनिश्चित हो सके।
💊 नई संरचना की आयरन गोलियां होंगी उपलब्ध
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मिलिंद वर्धन के प्रस्ताव पर आयरन फोलिक एसिड की संरचना में बदलाव को मंजूरी दी गई है।
अब—
🔄 फैरस सल्फेट की जगह फेरस एस्कॉरबेट आधारित आयरन फोलिक एसिड गोलियां खरीदी जाएंगी।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन को नई संरचना की गोलियों की खरीद तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
✍️ सरकारी कलम की राय
एनीमिया एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली स्वास्थ्य समस्या है। स्कूल स्तर से लेकर पंचायत तक यह अभियान शुरू करना सरकार की दूरदर्शी पहल मानी जा सकती है।
यदि डिजिटल ट्रैकिंग और सामुदायिक भागीदारी प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो प्रदेश में एनीमिया की दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
📢 क्या आपको लगता है कि “एनीमिया मुक्त विद्यालय” अभियान सफल होगा?
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