बाराबंकी के मसौली ब्लॉक में प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक की ड्यूटी पहले से विधान सभा चुनाव के पुनरीक्षण (SIR) में बतौर बीएलओ लगी हुई है। साथ ही पंचायत चुनाव के लिए भी बीएलओ की ड्यूटी कर रहे हैं। अब उनकी ड्यूटी यूपी बोर्ड परीक्षा में भी लगा दी गई है।
कस-1 लिए मतदाता
SIR में बीएलओ ड्यूटी पहले से लगी, उन्हीं शिक्षकों को बोर्ड परीक्षा ड्यूटी थमा दी
लखनऊ ऊपर दिए गए दो केस अधिकारियों के काम करने की शैली और शिक्षकों की समस्या को बताने के लिए काफी हैं। ये समस्या किसी एक शिक्षक या एक जिले की नहीं। प्रदेशभर में सभी जिलों से ऐसी शिकायतें आ रही हैं। ये शिक्षक अपनी एक ड्यूटी कटवाने के लिए आवेदन भी कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल कोई सुनवाई नहीं हो रही। समस्या यह भी है कि वे अधिकारियों से बात करते हैं तो समस्या समझने की बजाय अपनी लगाई हुई ड्यूटी को जरूरी बताते हैं। कार्रवाई की चेतावनी भी मिलती है।
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह कहते हैं कि बीएलओ ड्यूटी हो
B.L.O. डयूटी
लखनऊ में माल ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय के भी
कस-2 है। उनकी भी
एक शिक्षक की ड्यूटी पहले से SIR में लगी बोर्ड परीक्षा ड्यूटी का आदेश आ गया है। अब वे परेशान हैं कि कौन सी ड्यूटी करें? कोई भी एक ड्यूटी नहीं करते हैं तो कार्रवाई हो सकती है।
या बोर्ड परीक्षा। सभी में ड्यूटी जिले के अधिकारी लगाते हैं। सभी का ब्योरा उनके पास होता है, लेकिन वे बिना देखे शिक्षकों की ड्यूटी कई जगह लगा देते हैं। इसके अलावा भी कई तरह की ट्रेनिंग और अन्य ड्यूटी भी लगा दी जाती हैं। शिक्षक इन्हीं ड्यूटी में उलझे रहेंगे तो फिर पढ़ाएंगे कब ? ये कोई सोचने वाला नहीं है। इस बारे में यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह का कहना है कि बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी तो शिक्षक ही करेंगे। अन्य ड्यूटी तो किसी भी विभाग के कर्मचारी कर लेंगे। परीक्षा साल में एक बार होती है। खुद मुख्य सचिव आदेश दे चुके हैं कि परीक्षा के दौरान बाकी ड्यूटी से शिथिलता दी जाए। इस बारे में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश भी भेजे गए हैं।
