⚖️ पत्नी को सम्मानजनक जीवन का अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति की याचिका की खारिज

⚖️ पत्नी को सम्मानजनक जीवन का अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति की याचिका की खारिज

प्रयागराज/गाजियाबाद। पत्नी के भरण-पोषण के मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए Allahabad High Court ने स्पष्ट किया है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-125 का उद्देश्य केवल पत्नी को भूखमरी या आर्थिक संकट से बचाना नहीं, बल्कि उसे पति की सामाजिक और आर्थिक हैसियत के अनुरूप सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना भी है।

न्यायमूर्ति Madan Pal Singh की एकल पीठ ने गाजियाबाद परिवार न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाली पति की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।


💰 क्या था मामला?

गाजियाबाद निवासी पति को परिवार न्यायालय ने आदेश दिया था कि वह आवेदन की तिथि से अपनी पत्नी को ₹15,000 प्रतिमाह भरण-पोषण देगा।

पति ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा—

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  • पत्नी शिक्षित और नौकरीपेशा है
  • उसकी वार्षिक आय (मई 2018 आयकर रिटर्न के अनुसार) ₹11,28,780 है
  • पत्नी आर्थिक रूप से स्वतंत्र है
  • पत्नी ने स्वेच्छा से घर छोड़ा
  • वह सास-ससुर के साथ रहने को तैयार नहीं थी
  • बीमार माता-पिता की देखभाल के कारण उसे नौकरी छोड़नी पड़ी

पति का तर्क था कि वह आर्थिक रूप से दबाव में है, इसलिए भरण-पोषण देना उसके लिए संभव नहीं।


🏢 पत्नी का पक्ष: आय और जीवन स्तर में बड़ा अंतर

पत्नी की ओर से कहा गया कि—

  • पति ने अपनी वास्तविक आय और जीवन स्तर अदालत से छिपाया
  • निचली अदालत में दिए बयान में पति ने स्वीकार किया था कि अप्रैल 2018 से अप्रैल 2020 के बीच वह JPMorgan Chase में कार्यरत था
  • उसका वार्षिक पैकेज लगभग ₹40 लाख था

पत्नी का कहना था कि उसकी आय की तुलना में पति की आय और सामाजिक स्थिति कहीं अधिक है। इसलिए मात्र इस आधार पर कि पत्नी नौकरी करती है, उसे भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता।


🧾 हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा—

✔️ पति अपनी आय में कमी आने का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।
✔️ पत्नी की आय इतनी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती कि वह वैवाहिक जीवन के दौरान जिस स्तर की अभ्यस्त थी, उसी स्तर पर जीवनयापन कर सके।
✔️ केवल इस आधार पर कि पत्नी कुछ आय अर्जित करती है, उसे भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने दोहराया कि धारा-125 सीआरपीसी का उद्देश्य सामाजिक न्याय है और यह प्रावधान पत्नी को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार देता है।


📌 क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?

यह निर्णय उन मामलों में मार्गदर्शक सिद्ध होगा जहाँ—

  • पत्नी नौकरीपेशा हो
  • पति अधिक आय वाला हो
  • आय और जीवन स्तर में स्पष्ट अंतर हो

कोर्ट ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भरण-पोषण का निर्धारण केवल पत्नी की आय देखकर नहीं, बल्कि पति की आर्थिक स्थिति और वैवाहिक जीवन के दौरान स्थापित जीवन स्तर को ध्यान में रखकर किया जाएगा।


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आपकी क्या राय है? क्या नौकरीपेशा पत्नी को भी भरण-पोषण मिलना चाहिए? अपनी प्रतिक्रिया जरूर साझा करें।

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