⚖️ सिर्फ पूछताछ के लिए गिरफ्तारी नहीं हो सकतीसुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस को दी स्पष्ट चेतावनी


⚖️ सिर्फ पूछताछ के लिए गिरफ्तारी नहीं हो सकती

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस को दी स्पष्ट चेतावनी

नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को केवल पूछताछ के लिए गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी करना पुलिस अधिकारी का वैधानिक विवेकाधिकार (Discretion) है, अनिवार्य कर्तव्य नहीं

🔍 अदालत ने यह भी साफ किया कि गिरफ्तारी का इस्तेमाल जांच को आगे बढ़ाने की वास्तविक जरूरत के आधार पर ही होना चाहिए, न कि पुलिस की सुविधा या दबाव बनाने के लिए।


👨‍⚖️ क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा—

“गिरफ्तारी की शक्ति को वस्तुनिष्ठ आवश्यकता के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि पुलिस अधिकारी की सुविधा के रूप में।”

⚠️ अदालत ने विशेष रूप से कहा कि 7 वर्ष तक की सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी तभी होनी चाहिए, जब—

  • बिना गिरफ्तारी के जांच आगे बढ़ पाना संभव न हो
  • आरोपी के फरार होने की आशंका हो
  • साक्ष्य से छेड़छाड़ की संभावना हो

❌ सिर्फ सवाल पूछने के लिए गिरफ्तारी गलत

सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि—

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🚫 केवल सवाल-जवाब (Interrogation) के लिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करना कानून के खिलाफ है।

यदि पुलिस ऐसा करती है तो यह
👉 BNSS की धारा 35 के उद्देश्य को ही विफल कर देगा।


📜 नोटिस के बाद गिरफ्तारी “सामान्य प्रक्रिया” नहीं

यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान की गई।
मामला यह था कि—

❓ क्या 7 साल तक की सजा वाले सभी मामलों में
BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करना अनिवार्य है?

🧠 सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि—

  • नोटिस जारी करने के बाद स्वतः गिरफ्तारी जरूरी नहीं
  • हर मामले में परिस्थितियों का आकलन जरूरी है

🧑‍🏫 आम नागरिक और कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

यह फैसला खास तौर पर—

  • सरकारी कर्मचारियों
  • शिक्षकों
  • आम नागरिकों

के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

📌 अब पुलिस—

  • बिना ठोस कारण
  • केवल दबाव बनाने
  • या पूछताछ के बहाने

👉 गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी।


✍️ सरकारी कलम की राय

यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि—

🛑 कानून का मकसद डर पैदा करना नहीं, न्याय सुनिश्चित करना है।

👉 उम्मीद है कि इस फैसले से
मनमानी गिरफ्तारी पर रोक लगेगी और
नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।


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