⚖️ 37 साल सेवा के बाद पेंशन से वंचित करना अन्यायपूर्णइलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, OPS को लेकर कर्मचारियों को राहत

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⚖️ 37 साल सेवा के बाद पेंशन से वंचित करना अन्यायपूर्ण

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, OPS को लेकर कर्मचारियों को राहत

प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि दशकों तक सेवा देने वाले किसी कर्मचारी को केवल इस आधार पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसका नियमितीकरण नई पेंशन योजना (NPS) लागू होने के बाद हुआ

👨‍⚖️ अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि
37 वर्षों की लंबी सेवा के बाद कर्मचारी को पेंशन से वंचित करना सरासर अन्यायपूर्ण है।


👨‍⚖️ किस पीठ ने दिया फैसला?

यह आदेश
मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और
न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने दिया।

खंडपीठ ने केंद्र सरकार और रेलवे की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें
रेल कर्मचारी मोहम्मद शमीम के पक्ष में पारित
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के आदेश को चुनौती दी गई थी।


🧾 पूरा मामला क्या है?

🔹 मोहम्मद शमीम को
10 नवंबर 1975 को उत्तरी रेलवे में
👉 कमीशन वेटर के रूप में नियुक्त किया गया था।

🔹 120 दिन की सेवा पूरी करने के बाद
👉 उन्हें अस्थायी कर्मचारी (Temporary Status) का दर्जा मिल गया।

🔹 उन्होंने रेलवे में कुल
👉 37 साल की निरंतर सेवा दी।

🔹 शमीम
👉 31 अक्टूबर 2014 को सेवानिवृत्त हुए।

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🔹 हालांकि उनकी सेवाओं का
👉 औपचारिक नियमितीकरण 10 दिसंबर 2007 को हुआ,
जब नई पेंशन योजना (NPS) लागू हो चुकी थी।


🚆 रेलवे की दलील क्या थी?

रेलवे के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि—

❌ चूंकि शमीम का नियमितीकरण 2007 में हुआ
❌ और उस समय NPS लागू थी
❌ इसलिए वह OPS के हकदार नहीं हैं


❌ हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की रेलवे की दलील?

हाईकोर्ट ने रेलवे की दलीलों को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया।

📌 कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के
“मुंशी राम बनाम भारत सरकार” मामले का हवाला देते हुए कहा—

✔️ नियमितीकरण से पहले की गई
50% अस्थायी सेवा
👉 पेंशन के लिए अर्हक सेवा मानी जाएगी

✔️ इसलिए
👉 अस्थायी दर्जे से लेकर नियमितीकरण तक की
100% सेवा
👉 पेंशन गणना में शामिल की जानी चाहिए


⚖️ सेवा अवधि को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

कोर्ट ने दो टूक कहा—

🛑 केवल कागजी नियमितीकरण के आधार पर
कर्मचारी की दशकों की वास्तविक सेवा को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता।


⚖️ समानता के अधिकार पर भी जोर

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि—

🔹 रेलवे के विभिन्न जोन के कर्मचारियों के साथ
👉 अलग-अलग मापदंड नहीं अपनाए जा सकते

🔹 जब अन्य जोन में
👉 कमीशन वेंडर्स / वेटर्स को OPS का लाभ दिया जा रहा है
👉 तो याची को भी
संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के तहत
👉 वही लाभ मिलना चाहिए


🧑‍🏫 कर्मचारियों के लिए क्यों ऐतिहासिक है यह फैसला?

यह निर्णय—

✅ OPS बनाम NPS बहस में कर्मचारियों के पक्ष को मजबूत करता है
✅ लंबे समय तक अस्थायी सेवा देने वालों को राहत देता है
✅ सरकारी विभागों की मनमानी पर रोक लगाता है

📢 खासकर
रेलवे, शिक्षक, संविदा व अस्थायी कर्मचारी
इस फैसले से मजबूत कानूनी आधार पा सकते हैं।


✍️ सरकारी कलम की राय

यह फैसला साफ संदेश देता है कि—

🛑 सरकार और विभाग कर्मचारी की सेवा लेंगे,
लेकिन रिटायरमेंट पर उसे पेंशन से वंचित नहीं कर सकते।

👉 OPS केवल योजना नहीं,
👉 कर्मचारी की सामाजिक सुरक्षा है।

सरकारी कलम मानता है कि
ऐसे फैसले देशभर के कर्मचारियों के लिए
👉 न्याय की उम्मीद और
👉 संघर्ष की ताकत बनेंगे।


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