⚖️ फैसले सुरक्षित रखकर सालों तक न सुनाना गंभीर चिंता: CJI सूर्यकांतसुने जाने के बाद फैसले में देरी नहीं होनी चाहिए”


⚖️ फैसले सुरक्षित रखकर सालों तक न सुनाना गंभीर चिंता: CJI सूर्यकांत

“सुने जाने के बाद फैसले में देरी नहीं होनी चाहिए”

देश की न्यायिक व्यवस्था को लेकर मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने एक बेहद अहम और संवेदनशील मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई है
उन्होंने कहा कि—

जब सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा जाता है,
तो उसकी घोषणा में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

सीजेआई ने साफ शब्दों में कहा कि
⚠️ यह समस्या किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है और इसे हर हाल में ठीक किया जाना चाहिए।


🏛️ हाईकोर्ट्स में फैसले लटकने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि—

  • कुछ उच्च न्यायालयों में
  • फैसले सुरक्षित रखने के बाद
  • उन्हें सुनाने में अत्यधिक देरी की जा रही है

यह स्थिति—

❌ न्याय में देरी
❌ न्याय से वंचित करने
❌ और संविधान की भावना के खिलाफ है

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📅 7–8 फरवरी को CJs सम्मेलन में उठेगा मुद्दा

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि—

📌 7 और 8 फरवरी को होने वाले
👉 सभी उच्च न्यायालयों के
👉 मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में

इस विषय को
🗂️ एजेंडा में शामिल किया गया है
और इस पर
🗣️ विस्तार से चर्चा की जाएगी।

सीजेआई ने कहा—

“यह पहले से तय एजेंडा का हिस्सा है और
इस समस्या का समाधान निकाला जाना जरूरी है।”


⏳ तीन साल से सुरक्षित फैसला, तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

सीजेआई की यह टिप्पणी
झारखंड हाईकोर्ट से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई।

🔍 इस मामले में—

  • एक फैसला
  • तीन साल से अधिक समय तक सुरक्षित रखा गया
  • लेकिन उसे सुनाया नहीं गया

👉 इससे आहत होकर
👉 चार दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

यही मामला
⚖️ न्याय में देरी की गंभीर मिसाल बन गया।


📌 क्यों है यह मुद्दा बेहद अहम?

👉 Justice delayed is Justice denied
(देरी से मिला न्याय, न्याय नहीं होता)

  • फैसला सुरक्षित रखना
    ✔️ न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है
  • लेकिन
    ❌ उसे वर्षों तक न सुनाना
    ❌ आम नागरिक के अधिकारों का हनन है

सीजेआई की टिप्पणी
🔔 न्यायपालिका के भीतर
🔔 आत्ममंथन की जरूरत की ओर इशारा करती है।


✍️ सरकारी कलम की टिप्पणी

सरकारी कलम का स्पष्ट मत है—

⚖️ न्यायपालिका की विश्वसनीयता
तभी बनी रहेगी,
जब फैसले समय पर आएंगे।

📌 आम आदमी के लिए
📌 सालों तक फैसला लटकना
📌 मानसिक, आर्थिक और सामाजिक सजा के समान है।

अब उम्मीद है कि
🛑 सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती के बाद
उच्च न्यायालयों में
फैसले लटकाने की परंपरा पर लगाम लगेगी।


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क्योंकि समय पर न्याय, लोकतंत्र की असली पहचान है। ⚖️

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