⚖️ सुप्रीम कोर्ट का व्हाट्सएप–मेटा को दो टूक संदेश संविधान नहीं मान सकते तो भारत छोड़ दें”


⚖️ सुप्रीम कोर्ट का व्हाट्सएप–मेटा को दो टूक संदेश

“संविधान नहीं मान सकते तो भारत छोड़ दें”

निजता के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और उसकी मूल कंपनी मेटा को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि—

अगर आप भारत का संविधान नहीं मान सकते,
तो देश छोड़ दें।
🇮🇳⚖️

लक्षित विज्ञापन (Targeted Ads) के लिए यूजर्स का निजी डाटा साझा करने पर अदालत ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारोबारी हितों के लिए
👉 नागरिकों की निजता से समझौता नहीं किया जा सकता।


👩‍⚖️ किस पीठ ने की सुनवाई?

इस अहम मामले की सुनवाई—

  • मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत (CJI)
  • जस्टिस जॉयमाल्या बागची
  • जस्टिस विपुल पंचोली

की पीठ ने की।

पीठ ने कहा कि कंपनियों ने
🛑 देश के संवैधानिक मूल्यों का मजाक उड़ाया है।


🚨 “टेक इट ऑर लीव इट” नीति पर तीखी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि—

📌 2021 में लाई गई व्हाट्सएप की निजता नीति,
जिसे “Take it or Leave it” मॉडल कहा गया,
असल में—

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यूजर्स का निजी डाटा चोरी करने का एक सभ्य तरीका है।

कोर्ट ने साफ किया कि—

  • जब डाटा का इस्तेमाल सिर्फ व्यावसायिक कारणों से होता है
  • तब निजता के मौलिक अधिकार पर गंभीर खतरा पैदा होता है
  • जिसे भारतीय कानून के तहत सख्ती से संरक्षित किया गया है

🗣️ जस्टिस सूर्यकांत की कड़ी फटकार

जस्टिस सूर्यकांत ने व्हाट्सएप से सीधे सवाल किए—

📱 “मुझे अपने मोबाइल में दिखाइए,
आखिर यूजर को बाहर निकलने (Opt-out) का विकल्प कहां दिया है?”

उन्होंने कहा—

  • आप अपना व्यावसायिक हित जानते हैं
  • यह भी जानते हैं कि उपभोक्ताओं को एप का आदी कैसे बनाया गया
  • यह डाटा चोरी करने का अच्छा तरीका है

⚠️ निजता का अधिकार संविधान से संरक्षित है,
इससे किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।

“आप संविधान का मजाक उड़ा रहे हैं।”


📜 2021 की नीति से जुड़ा है पूरा विवाद

यह मामला व्हाट्सएप की 2021 की निजता नीति से जुड़ा है, जिसमें—

  • मेटा के साथ डाटा साझा करना अनिवार्य कर दिया गया
  • जबकि 2016 की नीति में
    ✅ यूजर्स को डाटा शेयरिंग से बाहर निकलने का विकल्प था

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने इसे—

❌ प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन
❌ प्रभुत्व के दुरुपयोग

मानते हुए कार्रवाई की थी।


💰 213.14 करोड़ का जुर्माना, फिर सुप्रीम कोर्ट

📅 नवंबर 2024
➡️ CCI ने व्हाट्सएप पर
💸 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया
➡️ 5 वर्षों तक डाटा साझा करने पर रोक

📅 नवंबर 2025
➡️ एनसीएलएटी ने जुर्माना बरकरार रखा
➡️ कुछ बिंदुओं पर आंशिक राहत दी

इसके बाद कंपनियां सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं।


🌾 “ग्रामीण उपभोक्ता शर्तें कैसे समझेगा?” — CJI

मुख्य न्यायाधीश ने बेहद अहम सवाल उठाया—

“ग्रामीण इलाकों या सीमित शिक्षा वाले लोग
आपकी जटिल शर्तें कैसे समझ पाएंगे?”

उन्होंने कहा—

  • तमिलनाडु के किसी गांव का व्यक्ति
  • जो सिर्फ अपनी भाषा जानता है
  • वह आपकी गोपनीयता नीति कैसे समझेगा?

👉 व्हाट्सएप को निर्देश दिया गया है कि वह
निजता नीति और डाटा साझाकरण की प्रक्रिया पर
विस्तृत हलफनामा दाखिल करे।


🛑 “निजी डाटा से बाजार पर एकाधिकार”

कोर्ट ने टिप्पणी की कि—

  • कंपनियां उपभोक्ताओं को विकल्पहीन बनाकर
  • निजी डाटा के सहारे
  • बाजार पर एकाधिकार जमा कर रही हैं

⚠️ कंपनी के व्यावसायिक हितों के लिए
लोगों की निजता से खिलवाड़ की अनुमति नहीं दी जा सकती।


📅 अगली सुनवाई कब?

  • केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया गया है
  • 📆 9 फरवरी को अगली सुनवाई
  • उसी दिन अंतरिम आदेश जारी किया जाएगा

✍️ सरकारी कलम की टिप्पणी

सरकारी कलम का साफ मत है—

📌 डिजिटल इंडिया का मतलब
❌ नागरिकों की निजता की कुर्बानी नहीं हो सकता
📌 संविधान सर्वोपरि है —
चाहे सामने कितनी भी बड़ी टेक कंपनी क्यों न हो

अब देखना यह है कि
⚖️ सुप्रीम कोर्ट इस लड़ाई में
निजता के अधिकार को कितनी मजबूत ढाल देता है।


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