🔴 शिक्षक तबादला मामला: हाईकोर्ट सख्त, 14.11.2025 का आदेश बना “अव्यवस्था” की वजह
📍 Mukesh Kumar And 22 Others बनाम उत्तर प्रदेश सरकार
उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के तबादले को लेकर एक बार फिर सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने साफ शब्दों में माना है कि सरकार के एक के बाद एक आदेशों ने अराजक स्थिति (Chaotic Situation) पैदा कर दी है।
इस मामले में Mukesh Kumar और 22 अन्य शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती मंजू रानी चौहान ने शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। ⚖️📚
🧾 क्या है पूरा मामला?
- दिनांक 23.05.2025 को राज्य सरकार द्वारा एक तबादला आदेश जारी किया गया
- इस आदेश के तहत कई शिक्षक पहले ही स्थानांतरित होकर जॉइन कर चुके थे
- इसके बावजूद सरकार ने 14.11.2025 को एक और नया शासनादेश जारी कर दिया
- कारण बताया गया 👉 Student-Teacher Ratio बनाए रखना
👉 लेकिन कोर्ट ने माना कि जब पहले ही तबादले हो चुके थे, तो दूसरे आदेश की कोई जरूरत ही नहीं थी।
⚖️ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
माननीय न्यायालय ने स्पष्ट कहा 👇
“पहले आदेश के तहत तबादले पूरे हो चुके थे, ऐसे में दूसरा शासनादेश जारी करना अनावश्यक था और इससे अव्यवस्था फैल गई।”
📌 कोर्ट के अनुसार:
- दूसरा आदेश अव्यवस्थित और भ्रमित करने वाला है
- शिक्षकों को बार-बार मानसिक तनाव में डाला जा रहा है
- प्रशासनिक अस्थिरता का खामियाजा शिक्षक क्यों भुगतें?
🛑 शिक्षकों को बड़ी राहत
हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा 👇
✅ 10 फरवरी 2026 तक
❌ याचिकाकर्ता शिक्षकों के खिलाफ कोई भी दमनात्मक (Coercive) कार्रवाई नहीं की जाएगी
यह आदेश शिक्षकों के लिए संजीवनी की तरह है 🙏
👩🏫👨🏫 शिक्षक क्यों नाराज़ हैं?
- बार-बार तबादला आदेश
- बिना प्लानिंग के नीति निर्माण
- परिवार, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर असर
- शिक्षकों को “संख्या” समझने की मानसिकता
📣 शिक्षक संगठनों का कहना है कि
“Student-Teacher Ratio सुधारने के नाम पर शिक्षकों का शोषण नहीं होना चाहिए।”
🔎 सरकारी कलम की राय ✍️
सरकारी कलम का स्पष्ट मानना है कि –
👉 शिक्षक कोई मोहरा नहीं हैं
👉 नीतियां स्थिर और पारदर्शी होनी चाहिए
👉 एक आदेश पर अमल होने के बाद दूसरा आदेश जारी करना प्रशासनिक विफलता है
अगर सरकार सच में शिक्षा व्यवस्था सुधारना चाहती है, तो
📌 नए पद सृजित करे
📌 स्थायी नीति बनाए
📌 शिक्षकों को सम्मान दे
📅 आगे क्या?
🗓️ 10.02.2026 को मामला दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है
👀 सभी शिक्षकों की नजर अब कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है

