UP Teachers Relief: 2010 से पहले नियुक्त 1.86 लाख शिक्षकों को मिल सकती है बड़ी राहत, केंद्र ने मांगा पूरा ब्योरा
लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत उन लाखों शिक्षकों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगी है, जो शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर संकट में थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के उस फैसले के बाद उपजे हालातों की समीक्षा शुरू कर दी है, जिसने पुराने शिक्षकों की सेवा पर सवालिया निशान लगा दिया था।
शिक्षा मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार सहित सभी राज्यों से 16 जनवरी 2026 तक ऐसे शिक्षकों का पूरा डेटा मांगा है, जिनकी नियुक्ति 2010 से पहले हुई थी और जिन्होंने अब तक TET पास नहीं किया है।
क्यों पैदा हुआ संकट? (समझें पूरा मामला)
घटनाक्रमप्रभावSC का फैसला (1 Sep 2025)5 साल से अधिक सेवा बचे शिक्षकों के लिए 2 साल में TET अनिवार्य।नहीं तो क्या?TET पास न करने पर ‘अनिवार्य सेवानिवृत्ति’ (Compulsory Retirement) का खतरा।UP की स्थितिलगभग 1.86 लाख शिक्षक सीधे तौर पर प्रभावित।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए TET एक न्यूनतम योग्यता है, जिसे सभी इन-सर्विस शिक्षकों को (जिनकी रिटायरमेंट में 5 साल से अधिक समय है) 2 साल के भीतर हासिल करना होगा।
शिक्षक संगठनों और सरकार की पहल
कोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षकों में भारी तनाव था। तर्क दिया गया कि जो शिक्षक रिटायरमेंट के करीब हैं, उनके लिए इस उम्र में फिर से परीक्षा में बैठना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
- अभ्यावेदन: शिक्षक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार को हजारों पत्र भेजकर मानवीय आधार पर छूट की मांग की।
- ब्योरा तलब: इसी को देखते हुए केंद्र ने राज्यों से निम्नलिखित जानकारी मांगी है:
- 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की सटीक संख्या।
- उनकी वर्तमान आयु और सेवा का शेष समय।
- इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाला प्रशासनिक प्रभाव।
क्या मिल सकती है छूट?
जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार इस डेटा के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) या स्पष्टीकरण दाखिल कर सकती है। यदि सरकार कोर्ट को समझाने में सफल रही कि अनुभवी शिक्षकों को इस पात्रता से मुक्त रखा जाए, तो 1.86 लाख शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित हो जाएगी।
शिक्षकों के लिए आगे क्या?
फिलहाल, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग तेजी से डेटा संकलन में जुटा है। 16 जनवरी के बाद केंद्र सरकार का अगला कदम तय होगा। तब तक शिक्षकों को धैर्य बनाए रखने और आधिकारिक निर्देशों का इंतजार करने की सलाह दी गई है।
Sarkari Kalam की राय: सेवा के अंतिम वर्षों में शिक्षकों पर परीक्षा का दबाव डालना उनकी गरिमा और अनुभव के विपरीत है। केंद्र सरकार का डेटा मांगना सकारात्मक दिशा में बढ़ा कदम है।
इस वीडियो में आप सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बारीकियां और शिक्षकों पर इसके प्रभाव को विस्तार से समझ सकते हैं: CTET/TET Compulsory for All Teachers: Supreme Court’s Latest Order Explained
