High Court Decisions: तकनीकी खामी के आधार पर ट्रांसफर आवेदन रद्द करना गलत, हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव को किया तलब
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में शिक्षकों के अंतरजनपदीय स्थानांतरण (Inter-district Transfer) को लेकर एक बड़ा सिद्धांत प्रतिपादित किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि आवेदक की अपनी कोई गलती नहीं है, तो विभाग ‘तकनीकी खामी’ का बहाना बनाकर आवेदन निरस्त नहीं कर सकता।
1. स्थानांतरण पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने फर्रुखाबाद के एक प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर, असद उल्ला खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
- मामला क्या है? याची ने अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था, जिसे विभाग ने यह कहकर खारिज कर दिया कि तकनीकी त्रुटि के कारण समय पर विचार नहीं हो सका और अब ऑफलाइन विचार करना संभव नहीं है।
- कोर्ट का रुख: कोर्ट ने कहा कि विभाग की तकनीकी कमियों की सजा कर्मचारियों को नहीं दी जा सकती। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
2. ‘एक मुद्दा, दो याचिकाएं’ स्वीकार्य नहीं
एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता।
- आदेश: यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति निरस्त होने के खिलाफ दायर याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है, तो उसी मामले से जुड़े वेतन रिकवरी (Salary Recovery) के आदेश को चुनौती देने के लिए नई याचिका दायर नहीं की जा सकती।
- तर्क: न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने कहा कि एक ही विषय पर दोहरी याचिकाएं पोषणीय (Maintainable) नहीं हैं।
3. सरकारी वकील के निजी केस लड़ने पर सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकीलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- सवाल: कोर्ट ने पूछा है कि क्या राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता (ACSC) उन मामलों में किसी निजी पक्ष की पैरवी कर सकते हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश राज्य स्वयं एक पक्षकार हो?
- यह मामला ‘मीरा देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसकी जांच अब एकल पीठ कर रही है।
4. संभल जामा मस्जिद मामला: अब 24 फरवरी को सुनवाई
संभल के चर्चित शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद में गुरुवार को होने वाली सुनवाई टल गई है।
- कारण: सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आदित्य सिंह की अदालत ने कहा कि चूंकि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए स्थानीय अदालत में सुनवाई स्थगित की जाती है।
- अगली तारीख: अब इस वाद पर 24 फरवरी 2026 को सुनवाई होगी।
एक नजर में मुख्य खबरें
विषयकोर्ट का फैसला/स्थितिटीचर ट्रांसफरतकनीकी आधार पर आवेदन रद्द करना अवैध, सचिव तलब।कानूनी नियमएक ही मामले में दो बार याचिका दायर नहीं की जा सकती।सरकारी वकीलनिजी पक्ष की पैरवी करने पर सरकार से जवाब तलब।संभल विवादअगली सुनवाई 24 फरवरी को तय।
Sarkari Kalam की सलाह: यदि आप भी बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं और आपके आवेदन को तकनीकी कारणों से रोका गया है, तो यह फैसला आपके लिए एक कानूनी नजीर (Precedent) बन सकता है।
