Voter List Update: 1.04 करोड़ मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, अब घर बैठे अपडेट होगा रिकॉर्ड; बीएलओ को मिले नए अधिकार
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर चुनाव आयोग ने एक ऐतिहासिक और राहत भरा फैसला लिया है। अब उन करोड़ों मतदाताओं को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिनका रिकॉर्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिल पा रहा था।
आयोग ने न केवल प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि तकनीकी रूप से बीएलओ (BLO) को भी सशक्त कर दिया है।
प्रमुख अपडेट: एक नजर में
विवरणमहत्वपूर्ण जानकारीकुल प्रभावित मतदातालगभग 1.04 करोड़नया नियमबीएलओ एप पर अपलोड होंगे दस्तावेजप्रमाण पत्र के विकल्प13 मान्य दस्तावेजों की सूचीविशेष राहतबिहार के प्रवासियों के लिए आसान प्रक्रिया
1. घर आएगा नोटिस, वहीं होगा समाधान
एसआइआर अभियान के दौरान प्रदेश में करीब 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता पाए गए हैं जिनका रिकॉर्ड 2003 की सूची में नहीं मिल सका है।
- नोटिस की प्रक्रिया: चुनाव आयोग इन सभी मतदाताओं को नोटिस जारी करेगा।
- बीएलओ की भूमिका: बीएलओ यह नोटिस सीधे मतदाता के घर जाकर सौंपेंगे।
- मौके पर सत्यापन: यदि मतदाता नोटिस मिलते ही बीएलओ को अपना कोई भी एक पहचान पत्र दे देता है, तो बीएलओ उसे अपने ‘बीएलओ एप’ के माध्यम से तत्काल अपलोड कर देगा। इससे मतदाता को ईआरओ (ERO) कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी।
2. व्यक्तिगत उपस्थिति की अनिवार्यता खत्म
आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए ईआरओ या सहायक ईआरओ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की शर्त को हटा दिया है। अब बीएलओ द्वारा डिजिटल सत्यापन ही पर्याप्त माना जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए प्रदेश भर में करीब 10 हजार अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
3. बिहार के प्रवासियों के लिए ‘स्पेशल’ राहत
उत्तर प्रदेश में रह रहे बिहार के मतदाताओं के लिए आयोग ने एक बड़ी सुविधा दी है:
- यदि किसी मतदाता का नाम बिहार की वर्तमान मतदाता सूची में दर्ज है, तो उसे यूपी में प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
- इससे प्रवासी मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों को अतिरिक्त दस्तावेज जुटाने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
4. ये 13 दस्तावेज होंगे मान्य (कोई भी एक)
चुनाव आयोग ने सत्यापन के लिए 13 अभिलेखों की सूची जारी की है, जिनमें से कोई भी एक होने पर मतदाता सूची में नाम सुरक्षित रहेगा:
- सरकारी/पीएसयू कर्मचारियों या पेंशनभोगियों का पहचान पत्र।
- बैंक/डाकघर/LIC द्वारा जारी पुराना पहचान पत्र (5 जुलाई 1987 से पहले का)।
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र।
- पासपोर्ट।
- हाईस्कूल/बोर्ड की मार्कशीट या शैक्षिक प्रमाण पत्र।
- स्थायी निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल)।
- वन अधिकार प्रमाण पत्र।
- जाति प्रमाण पत्र (OBC/SC/ST)।
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) रिकॉर्ड।
- परिवार रजिस्टर की नकल।
- सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान आवंटन पत्र।
- आधार कार्ड के साथ कोई अन्य पुराना प्रमाण।
- बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची।
प्रशासनिक तैयारी
सुनवाई और सत्यापन के लिए तहसील, ब्लॉक, नगर पालिका और नगर निगमों में विशेष केंद्र बनाए गए हैं। प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में ईआरओ के साथ-साथ 2,000 सहायक ईआरओ और 7,000 अतिरिक्त एईआरओ तैनात किए गए हैं ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूटने न पाए।
Sarkari Kalam की सलाह: यदि आपका नाम भी मतदाता सूची में संदिग्ध है, तो अपने बीएलओ से संपर्क करें और ऊपर दिए गए 13 दस्तावेजों में से कोई एक तैयार रखें। आपका एक वोट लोकतंत्र की ताकत है!
