⚡🚨 स्कूलों के ऊपर मौत की लाइन,प्राइमरी स्कूलों में हाईटेंशन तार, 8 हजार बच्चों की जान खतरे में


⚡ स्कूलों के ऊपर मौत की लाइन

67 प्राइमरी स्कूलों में हाईटेंशन तार, 8 हजार बच्चों की जान खतरे में

🖊️ सरकारी कलम विशेष | लखनऊ

शहर के 67 प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 8 हजार बच्चों की जान आज भी खतरे में है। वजह—
🏫 स्कूलों की छत और परिसर के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइनें और लगे ट्रांसफार्मर

कोहरे और धुंध के मौसम में बच्चे स्कूल आते-जाते और परिसर में खेलते हैं। ऐसे में किसी भी वक्त बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है।


💰 2.5 करोड़ रुपये भुगतान के बाद भी नहीं हटी लाइन

हैरानी की बात यह है कि
👉 बेसिक शिक्षा विभाग ने हाईटेंशन लाइन हटाने के लिए
👉 लेसा (विद्युत विभाग) को
👉 करीब 2.5 करोड़ रुपये का भुगतान छह माह पहले ही कर दिया है।

इसके बावजूद
❌ अब तक लाइनें नहीं हटाई गईं
❌ स्कूलों में स्थिति जस की तस बनी हुई है

प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने एक बार फिर हाईटेंशन लाइन हटाने की गुहार लगाई है।

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🏛️ शासन के निर्देश, फिर भी लापरवाही क्यों?

प्रदेश सरकार ने बीते वर्षों में
⚠️ स्कूलों में हाईटेंशन लाइन से हुई दुर्घटनाओं
का संज्ञान लेते हुए
👉 प्रदेश भर के स्कूलों से हाईटेंशन लाइन हटाने के निर्देश दिए थे।

इसी क्रम में
📋 बीएसए कार्यालय ने स्कूलों का सर्वे कराया
📍 लखनऊ में 67 स्कूल चिन्हित किए गए
📄 इनकी सूची विद्युत विभाग को सौंपी गई

फिर सवाल उठता है—
जब पैसा भी दे दिया गया, तो काम क्यों नहीं हुआ?


🧑‍🏫 शिक्षक संघ ने उठाया सवाल

सुरेश जायसवाल,
अध्यक्ष, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने कहा—

“बच्चों और शिक्षकों की जान खतरे में है।
जब विभाग ने खर्च का भुगतान कर दिया है,
तो विद्युत विभाग हाईटेंशन लाइन क्यों नहीं हटा रहा?”


⚠️ हर वक्त बना रहता है हादसे का डर

🔴 केस 1: बीकेटी – पूर्व माध्यमिक विद्यालय, परसहिया

  • स्कूल परिसर के ऊपर से हाईटेंशन लाइन
  • पास में ट्रांसफार्मर
  • करीब 50 बच्चे
  • बच्चे उन्हीं तारों के नीचे खेलते हैं

🔴 केस 2: काकोरी – महपति मऊ जूनियर स्कूल

  • 113 बच्चे पढ़ते हैं
  • परिसर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही
  • परिसर में पोल भी लगा
  • डीएम विशाख जी ने जुलाई में हटाने के निर्देश दिए
  • लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं

📍 इन ब्लॉकों में सबसे ज्यादा खतरा

हाईटेंशन लाइन से प्रभावित स्कूल—

  • माल
  • बीकेटी
  • चिनहट
  • सरोजनीनगर
  • गोसाईगंज
  • काकोरी

➡️ इन क्षेत्रों के स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चे रोज़ खतरे के साये में पढ़ाई कर रहे हैं।


🔧 विद्युत विभाग का दावा

अमौसी जोन के
अधीक्षण अभियंता (तकनीकी) का कहना है—

“हाईटेंशन लाइन हटाने का काम शुरू हो गया है।
प्रयास है कि 15 जनवरी तक लाइन हटा दी जाए।
भविष्य में कोई दिक्कत नहीं होगी।”

लेकिन सवाल यह है कि
छह महीने की देरी का जिम्मेदार कौन?


✍️ सरकारी कलम की राय

सरकारी कलम मानता है कि यह मामला केवल
⚡ बिजली
या
📄 फाइल
का नहीं है—

👉 यह बच्चों की जान का सवाल है।

जब
✔️ शासन का आदेश है
✔️ सर्वे पूरा हो चुका है
✔️ पैसा भी जारी हो गया है

तो फिर
देरी किसकी लापरवाही है?

📢 अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई और कोई हादसा हुआ,
तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

बच्चों की सुरक्षा में एक दिन की देरी भी अपराध है।


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