चयन वेतनमान ऑनलाइन, लेकिन हकीकत में ऑफलाइन!
एक साल बाद भी हजारों शिक्षक चयन वेतनमान से वंचित
🖊️ सरकारी कलम विशेष रिपोर्ट
प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के चयन वेतनमान की प्रक्रिया को एक साल पहले ऑनलाइन कर दिया था। उद्देश्य साफ था—
➡️ पारदर्शिता
➡️ समयबद्ध निस्तारण
➡️ शिक्षकों को अनावश्यक दौड़-भाग से राहत
लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है 😔।
🔴 175 ब्लॉक ऐसे, जहां एक भी चयन वेतनमान नहीं
प्रदेश में 175 विकास खंड ऐसे हैं, जहां आज तक एक भी शिक्षक का चयन वेतनमान नहीं लगाया गया। यह आंकड़ा अपने आप में सिस्टम की असफलता को उजागर करता है।
हैरानी की बात यह है कि
👉 महानिदेशक (DG) शिक्षा – मोनिका रानी स्वयं चयन वेतनमान के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दे चुकी हैं,
👉 इसके बावजूद ब्लॉक स्तर पर फाइलें धूल खा रही हैं।
❓ सवाल यह है—आदेश के बाद भी काम क्यों नहीं?
शिक्षकों का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया बीईओ (खंड शिक्षा अधिकारी) स्तर पर जानबूझकर लटकाई जा रही है।
ऑनलाइन आवेदन होने के बावजूद
📂 फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही
📂 आपत्तियों के नाम पर अनावश्यक विलंब किया जा रहा
📍 ये जिले सबसे ज्यादा प्रभावित
प्रदेश के कई बड़े जिले इस समस्या की चपेट में हैं—
- लखनऊ
- बाराबंकी
- उन्नाव
- संभल
- बस्ती
विशेष रूप से लखनऊ के
📌 मलिहाबाद
📌 सरोजनी नगर
📌 मोहनलालगंज
📌 नगर क्षेत्र (जोन-4)
के शिक्षक लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन
❌ न सुनवाई
❌ न समाधान
🧑🏫 शिक्षक बोले—“हमारा हक कब मिलेगा?”
चयन वेतनमान कोई कृपा नहीं, बल्कि
✔️ वर्षों की सेवा
✔️ अनुभव
✔️ नियमों के तहत मिलने वाला अधिकार है
इसके बावजूद शिक्षकों को
- कार्यालयों के चक्कर
- ऑनलाइन-ऑफलाइन भ्रम
- मानसिक प्रताड़ना
झेलनी पड़ रही है 😡।
⚠️ सरकार और विभाग से सीधा सवाल
जब प्रक्रिया ऑनलाइन है,
जब DG स्तर से आदेश हैं,
तो फिर बीईओ स्तर पर लापरवाही पर कार्यवाही क्यों नहीं?
क्या
👉 शिक्षकों का सब्र ही सबसे बड़ी कमजोरी मान ली गई है?
👉 या फिर जिम्मेदार अधिकारी किसी कार्रवाई से ऊपर हैं?
✊ सरकारी कलम की मांग
सरकारी कलम सरकार और विभाग से स्पष्ट मांग करता है—
1️⃣ चयन वेतनमान की समय सीमा तय की जाए
2️⃣ लंबित मामलों की ब्लॉक-वार समीक्षा हो
3️⃣ लापरवाही करने वाले बीईओ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो
4️⃣ शिक्षकों को बार-बार शिकायत करने को मजबूर न किया जाए
📢 शिक्षक चुप नहीं रहेंगे, अब सवाल उठेंगे।
सरकारी कलम शिक्षकों की आवाज बनकर यह मुद्दा लगातार उठाता रहेगा।
✍️ अगर आप भी चयन वेतनमान से वंचित हैं, तो अपनी बात हमें भेजें—आपकी आवाज़ को मंच मिलेगा।
