🧑🏫 बेसिक शिक्षकों के लिए ऑनलाइन हाजिरी: राहत के दावे, सवाल बरकरार
प्रदेश में माध्यमिक विद्यालयों के बाद अब नए साल से बेसिक विद्यालयों के शिक्षकों पर भी ऑनलाइन हाजिरी लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग तेज़ी से पोर्टल विकसित कर रहा है।
हालांकि विभाग इसे सुधारात्मक कदम बता रहा है, लेकिन मैदानी स्तर पर कार्यरत शिक्षकों में इसे लेकर असंतोष और आशंका दोनों मौजूद हैं।
💻 पोर्टल में “On Duty” विकल्प: राहत या औपचारिकता?
शिक्षकों के संभावित विरोध को देखते हुए विभाग ने पोर्टल में “ऑन ड्यूटी” (On Duty) का विकल्प देने की बात कही है।
👉 इसका अर्थ यह होगा कि
- बैठक
- प्रशिक्षण
- विभागीय टूर
- जिलाधिकारी/कमिश्नर स्तर की बैठकों
में शामिल शिक्षकों को अनुपस्थित नहीं माना जाएगा और वेतन कटौती नहीं होगी।
📌 प्रधानाध्यापक पूर्व सूचना के आधार पर शिक्षक को On Duty दिखा सकेंगे।
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📍 मोबाइल से हाजिरी, लोकेशन ट्रैकिंग: शिक्षक निगरानी में?
प्रस्तावित पोर्टल को
- डेस्कटॉप
- मोबाइल फोन
दोनों से प्रयोग किया जा सकेगा।
इसमें लोकेशन आधारित उपस्थिति भी दर्ज होगी।
😟 यहीं से शिक्षकों की चिंता बढ़ती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में—
- नेटवर्क की समस्या
- बिजली की बाधा
- तकनीकी जानकारी की कमी
इन हालात में लोकेशन आधारित हाजिरी शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बना सकती है।
⚖️ हाईकोर्ट के आदेश का हवाला, लेकिन शिक्षक सुविधाएं कब?
विभाग बार-बार उच्च न्यायालय के निर्देश का हवाला दे रहा है, लेकिन शिक्षक सवाल कर रहे हैं कि—
❓ अगर निगरानी बढ़ेगी तो
- EL-CL की स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं?
- हाफ डे लीव क्यों नहीं?
- स्वास्थ्य बीमा और मेडिकल सुविधा कब?
📢 शिक्षक संगठनों का कहना है कि
अनुशासन एकतरफा नहीं हो सकता, इसके साथ अधिकार और सुविधाएं भी जरूरी हैं।
⏰ आधे घंटे की देरी पर राहत, लेकिन स्थायी समाधान नहीं
विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि
🕒 30 मिनट तक देरी होने पर शिक्षक अनुपस्थित नहीं माने जाएंगे।
यह राहत अस्थायी है, क्योंकि—
- बारिश
- कोहरा
- यातायात
- दूरदराज़ के विद्यालय
इन स्थितियों में शिक्षकों की समस्या बनी ही रहती है।
✊ तैयारी के साथ विरोध भी जारी
जहां एक ओर
- तकनीकी समिति
- आठ सदस्यीय कमेटी
- माध्यमिक विभाग से समन्वय
के जरिए पोर्टल को अंतिम रूप दिया जा रहा है,
वहीं दूसरी ओर शिक्षक संगठनों का विरोध भी तेज़ होता जा रहा है।
📌 शिक्षकों का साफ कहना है—
हमें अपराधी की तरह नहीं, राष्ट्र निर्माता की तरह देखा जाए।
📝 सरकारी कलम की राय
ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था तभी सफल हो सकती है जब वह शिक्षक-हितैषी हो।
केवल निगरानी बढ़ाने से शिक्षा की गुणवत्ता नहीं सुधरेगी।
✔️ सम्मान
✔️ विश्वास
✔️ सुविधाएं
✔️ स्पष्ट नियम
इन चार स्तंभों पर ही कोई भी व्यवस्था टिक सकती है।
👉 सरकारी कलम शिक्षकों के साथ खड़ा है और मांग करता है कि
ऑनलाइन हाजिरी से पहले शिक्षक सुविधाओं को कानूनी और लिखित रूप से सुनिश्चित किया जाए।
✍️ सरकारी कलम
📰 शिक्षकों की आवाज़, शिक्षकों के पक्ष में
