☕ “हर्बल टी” कहकर नहीं बेच सकेंगे पौधा-आधारित पेय,चाय शब्द का इस्तेमाल सिर्फ असली चाय के लिए


☕ “हर्बल टी” कहकर नहीं बेच सकेंगे पौधा-आधारित पेय

FSSAI की सख्त चेतावनी: चाय शब्द का इस्तेमाल सिर्फ असली चाय के लिए

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य कारोबारियों (FBOs) को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जो पेय पदार्थ असली चाय के पौधे कैमेलिया सिनेंसिस से नहीं बने हैं, उन्हें “चाय (Tea)” के नाम से बेचना गैरकानूनी है ☕❌।

एफएसएसएआई ने कहा कि हर्बल टी, फ्लॉवर टी, रूइबोस टी जैसे उत्पादों की गलत ब्रांडिंग उपभोक्ताओं को गुमराह करने की श्रेणी में आती है और यह कानून का उल्लंघन है।


⚖️ क्या कहता है खाद्य कानून?

एफएसएसएआई के अनुसार—

📌 “चाय (Tea)” शब्द का उपयोग केवल उन्हीं पेय पदार्थों के लिए किया जा सकता है जो कैमेलिया सिनेंसिस पौधे से बने हों।

WhatsApp Channel Join Now
WhatsApp Group Join Now
Telegram Channel Join Now

✔️ वैध रूप से चाय कहे जाने वाले उत्पाद:

  • ग्रीन टी
  • ब्लैक टी
  • कांगड़ा टी
  • इंस्टेंट टी

❌ अवैध रूप से चाय नहीं कहे जा सकते:

  • हर्बल ड्रिंक
  • फ्लॉवर-बेस्ड ड्रिंक
  • रूइबोस
  • आयुर्वेदिक काढ़ा आधारित पेय

🚨 उल्लंघन पर क्या कार्रवाई होगी?

एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि—

  • यह उल्लंघन खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत आता है
  • गलत ब्रांडिंग पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्द किया जा सकता है
  • ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के विक्रेता इसके दायरे में आएंगे

👉 यानी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी “हर्बल टी” जैसे नाम अब खतरे में हैं ⚠️।


🏪 किन पर लागू होंगे ये नियम?

यह निर्देश सभी खाद्य व्यवसाय परिचालकों (FBOs) पर लागू होंगे, जिनमें शामिल हैं—

  • निर्माता
  • पैकर
  • वितरक
  • आयातक
  • थोक व खुदरा विक्रेता
  • ऑनलाइन फूड सेलर

एफएसएसएआई ने राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि
🔍 सभी विक्रेताओं पर कड़ी निगरानी रखी जाए और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।


🧠 उपभोक्ताओं के लिए क्यों जरूरी है यह फैसला?

इस फैसले से—
✔️ उपभोक्ता को सही जानकारी मिलेगी
✔️ भ्रामक मार्केटिंग पर रोक लगेगी
✔️ “हेल्थ ड्रिंक” के नाम पर भ्रम नहीं फैलेगा

अब ग्राहक जान पाएंगे कि—
👉 वह जो पी रहे हैं, वह असली चाय है या सिर्फ एक हर्बल पेय


✍️ सरकारी कलम की राय

सरकारी कलम मानता है कि यह फैसला
☑️ उपभोक्ता हित में
☑️ पारदर्शिता बढ़ाने वाला
☑️ और फूड इंडस्ट्री में अनुशासन लाने वाला है

सरकार का यह कदम “नाम नहीं, सच्चाई बेचो” की सोच को मजबूती देता है।


📢 सरकारी नियमों, उपभोक्ता अधिकारों और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए जुड़े रहें—
👉 www.sarkarikalam.com

📰 सरकारी कलम — सही जानकारी, सही समय पर

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top