📝 20 साल की सेवा और 45+ उम्र वाले शिक्षकों को बिना विकल्प भी मिलेगी ग्रेच्युटी
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए एक 🎉 बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से चली आ रही ग्रेच्युटी भुगतान से जुड़ी असमंजस की स्थिति को अब स्पष्ट कर दिया गया है।
📌 क्या है नया शासनादेश?
दिनांक 24 दिसंबर 2025 को जारी आदेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद तथा अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल में कार्यरत ऐसे शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी—
- 👉 जिन्होंने कम से कम 20 वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली है, या
- 👉 जिनकी आयु 45 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है
यदि वे 60 या 62 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्ति के विकल्प का चयन नहीं भी करते हैं, तब भी उन्हें नियमों के अनुसार ग्रेच्युटी भुगतान किया जाएगा। 💰
⚖️ पहले क्या समस्या थी?
अब तक स्थिति यह थी कि यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति अथवा 60/62 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्ति का औपचारिक विकल्प नहीं देता था, तो ग्रेच्युटी भुगतान में अड़चन आ जाती थी।
इस कारण कई पात्र कर्मचारी अपने वैध आर्थिक अधिकार से वंचित रह जाते थे। 😔
✅ अब क्या स्पष्ट किया गया है?
नए आदेश में यह साफ कर दिया गया है कि—
🔹 विकल्प न देने की स्थिति में भी
यदि शिक्षक/कर्मचारी ने निर्धारित सेवा अवधि या आयु पूरी कर ली है, तो उनकी सेवावधि के आधार पर ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा।
🏫 किन पर लागू होगा यह निर्णय?
- ✔️ उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक
- ✔️ सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल के शिक्षक
- ✔️ संबंधित शिक्षणेत्तर कर्मचारी
📢 अधिकारियों को दिए गए निर्देश
शासन द्वारा संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि इस निर्णय के अनुसार शीघ्र और सुनिश्चित कार्रवाई की जाए, ताकि पात्र कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। ⚙️
✨ शिक्षकों के लिए क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?
यह निर्णय न केवल न्यायसंगत है, बल्कि उन शिक्षकों के प्रति सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक भी है, जिन्होंने वर्षों तक शिक्षा जगत में अपनी सेवाएं दी हैं। 👩🏫👨🏫
ग्रेच्युटी जैसे वित्तीय अधिकार को विकल्प की तकनीकी शर्तों से अलग कर देना एक मानवीय और सकारात्मक कदम माना जा रहा है। 🌟
📍 निष्कर्ष
अब 20 वर्ष की सेवा या 45+ आयु पूर्ण कर चुके शिक्षकों और कर्मचारियों को ग्रेच्युटी भुगतान के लिए चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। यह फैसला शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों लोगों के लिए आर्थिक सुरक्षा और मानसिक राहत लेकर आया है। 🙏

UP में 1-1-2024 से 25 लाख हो गया है।

