❄️ शिक्षक-शिक्षामित्रों का शीतकालीन अवकाश निरस्त: क्या यह न्यायसंगत है?
त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन नामावली के नाम पर शिक्षकों पर फिर अतिरिक्त बोझ
📍 मथुरा | सरकारी कलम विशेष रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर शिक्षक और शिक्षामित्रों के शीतकालीन अवकाश पर संकट खड़ा हो गया है। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचक नामावली के वृहद पुनरीक्षण कार्य के अंतर्गत बीएलओ (BLO) के रूप में तैनात शिक्षकों व शिक्षामित्रों का शीतकालीन अवकाश निरस्त कर दिया गया है।
📄 यह आदेश जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) / जिलाधिकारी मथुरा द्वारा जारी किया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक चलने वाले निर्वाचन नामावली कार्य के कारण अवकाश के दौरान भी शिक्षकों को कार्य करना अनिवार्य होगा।
📌 क्या है पूरा मामला?
राज्य निर्वाचन आयोग, उत्तर प्रदेश के निर्देश पर त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचक नामावली का वृहद पुनरीक्षण कार्यक्रम घोषित किया गया है। इसके अंतर्गत—
🗓️ 23 दिसंबर 2025 – अनंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
🗓️ 24 से 30 दिसंबर 2025 – दावे एवं आपत्तियां प्राप्त करना
🗓️ 31 दिसंबर 2025 से 6 जनवरी 2026 – दावों/आपत्तियों का निस्तारण
🗓️ 7 से 12 जनवरी 2026 – पूरक सूचियों की तैयारी
🗓️ 30 जनवरी 2026 – अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
⚠️ इस पूरे समय में अधिकांश कार्य शीतकालीन अवकाश की अवधि में ही कराया जा रहा है।
👨🏫 सवालों के घेरे में प्रशासन का फैसला
शिक्षक संगठनों और शिक्षकों में इस आदेश को लेकर गहरी नाराज़गी है। उनका कहना है—
👉 क्या शिक्षक सिर्फ चुनावी कार्यों के लिए ही हैं?
👉 शीतकालीन अवकाश बच्चों और शिक्षकों दोनों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी नहीं?
👉 क्या गैर-शिक्षकीय कार्यों के लिए अलग से विभागीय स्टाफ नहीं हो सकता?
❄️ कड़ाके की ठंड, कोहरा और स्वास्थ्य जोखिमों के बीच घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन कराना अमानवीय प्रतीत होता है।
🧑⚖️ कानूनी व नैतिक पहलू
📜 पहले भी कई बार न्यायालय यह टिप्पणी कर चुका है कि—
“शिक्षकों से निरंतर गैर-शैक्षणिक कार्य कराना शिक्षा के अधिकार और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करता है।”
फिर भी हर चुनाव, सर्वे, जनगणना या पुनरीक्षण में सबसे पहले शिक्षक ही याद आते हैं।
😔 शिक्षामित्रों की दोहरी मार
शिक्षामित्र पहले ही—
- कम मानदेय
- अस्थायी सेवा
- सामाजिक असुरक्षा
जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में उनका अवकाश निरस्त करना घाव पर नमक छिड़कने जैसा है।
✊ सरकारी कलम की स्पष्ट राय
✍️ सरकारी कलम का मानना है कि—
🔹 चुनाव लोकतंत्र की आत्मा हैं, इसमें सहयोग आवश्यक है
🔹 लेकिन सहयोग शोषण में नहीं बदलना चाहिए
🔹 शिक्षकों के अवकाश, स्वास्थ्य और सम्मान की भी रक्षा होनी चाहिए
👉 यदि कार्य अनिवार्य है तो
✔️ अतिरिक्त मानदेय
✔️ विश्राम अवकाश (Compensatory Leave)
✔️ सीमित कार्य समय
जैसी सुविधाएं देना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
🔔 सरकार से अपेक्षा
🙏 राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से अपेक्षा है कि—
- शिक्षकों के हितों पर पुनर्विचार हो
- अवकाश निरस्तीकरण जैसे कठोर आदेशों पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए
- शिक्षा व्यवस्था को चुनावी कार्यों का स्थायी विकल्प न बनाया जाए
✨ शिक्षक देश का भविष्य गढ़ता है,
उसे थकाना नहीं – सम्मान देना चाहिए।
📢 आपकी राय क्या है?
क्या शीतकालीन अवकाश निरस्त किया जाना सही है?
कमेंट करके अपनी बात जरूर रखें।
🖊️ — सरकारी कलम
🌐 www.sarkarikalam.com

