लेखपाल भर्ती में आरक्षण विसंगतियों पर सरकार सख्त, 7994 पदों का प्रस्ताव होगा संशोधित 📋⚖️
लखनऊ।
राजस्व लेखपाल के 7994 पदों पर भर्ती के लिए जारी विज्ञापन के बाद आरक्षण से जुड़ी गंभीर विसंगतियां सामने आने पर सरकार हरकत में आ गई है। जनपदों से भेजे गए श्रेणीवार रिक्तियों के आंकड़ों में खामियां मिलने के बाद अब राजस्व परिषद ने दोबारा समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है।
परिषद ने स्पष्ट किया है कि एक सप्ताह के भीतर संशोधित भर्ती प्रस्ताव अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) को भेज दिया जाएगा, ताकि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और आरक्षण नियमों के अनुरूप आगे बढ़ाई जा सके।
मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद तेज हुई कार्रवाई 🔥
आरक्षण संबंधी विसंगतियों की जानकारी सामने आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के बाद संबंधित विभाग में हलचल मच गई। इसके बाद राजस्व परिषद ने कार्यरत और रिक्त पदों के श्रेणीवार आंकड़ों का दोबारा सत्यापन शुरू किया है।
गौरतलब है कि लेखपाल भर्ती का यह विज्ञापन 16 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था। लेकिन जिलों से प्राप्त आंकड़ों में गड़बड़ी के कारण अब भर्ती प्रक्रिया को संशोधन के दौर से गुजरना पड़ रहा है।
आरक्षण से कोई समझौता नहीं : सरकार 🛑
प्रदेश सरकार ने दो टूक कहा है कि—
“आरक्षण व्यवस्था में किसी भी तरह की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।”
राजस्व परिषद की सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि प्राथमिकता के आधार पर सभी जिलों से मिले आंकड़ों की गहन समीक्षा की जा रही है। संशोधित प्रस्ताव आयोग को भेजे जाने के बाद भर्ती प्रक्रिया नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी।
प्रतियोगियों के लिए क्या है संदेश? 🎯
✔️ भर्ती रद्द नहीं हुई है, केवल संशोधन किया जा रहा है
✔️ आरक्षण नियमों के पालन को लेकर सरकार पूरी तरह सख्त है
✔️ संशोधित प्रस्ताव के बाद प्रक्रिया कानूनी और निष्पक्ष होगी
👉 प्रतियोगियों को अफवाहों से बचते हुए केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए।
सरकारी कलम का विश्लेषण ✍️
सरकारी कलम मानता है कि—
- भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण की शुद्धता सर्वोपरि है
- समय रहते विसंगतियों को सुधारना प्रशासनिक पारदर्शिता का संकेत है
- प्रतियोगियों के भविष्य से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होनी चाहिए
📢 निष्पक्ष भर्ती ही योग्य उम्मीदवारों का अधिकार और सरकार की जिम्मेदारी है।
