यूपी में मतदाता सूची पुनरीक्षण की तारीख फिर बढ़ सकती है, 2.95 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन बना चुनौती 🗳️📋


यूपी में मतदाता सूची पुनरीक्षण की तारीख फिर बढ़ सकती है, 2.95 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन बना चुनौती 🗳️📋

लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की अंतिम तिथि एक बार फिर बढ़ाई जा सकती है। प्रदेश में करीब 2.95 करोड़ मतदाताओं के नामों को लेकर सत्यापन प्रक्रिया चल रही है और किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए चुनाव आयोग अतिरिक्त समय देने पर विचार कर रहा है।

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने कहा कि वर्तमान में चल रहे कार्यों की 26 दिसंबर को समीक्षा की जाएगी। यदि समीक्षा में यह पाया गया कि कार्य अधूरा है या और समय की आवश्यकता है, तो तीसरी बार तिथि बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है


2.95 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन, बड़ी प्रशासनिक कवायद 🔍

इस समय प्रदेश में—

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  • नए मतदाता जोड़े जा रहे हैं
  • 2.95 करोड़ मतदाताओं को खोजने और सत्यापित करने का कार्य चल रहा है
  • पुरानी मतदाता सूची से नई सूची की मैपिंग की जा रही है

यह पूरी प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रह जाए और अपात्र नामों को हटाया जा सके।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी बने आधार ⚖️

इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि—

“यदि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में आवश्यकता हो, तो एसआईआर की समयसीमा बढ़ाई जा सकती है।”

इसी निर्देश के आधार पर अब चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन तंत्र इस बात पर मंथन कर रहा है कि अंतिम तिथि बढ़ाना आवश्यक है या नहीं।


क्यों जरूरी है समय बढ़ाना? ⏳

✔️ मतदाता सूची में किसी भी तरह की चूक से बचाव
✔️ वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से कटने से रोकना
✔️ चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना

👉 विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का सत्यापन जल्दबाजी में करने से त्रुटियों की आशंका बढ़ जाती है


सरकारी कलम का विश्लेषण ✍️

सरकारी कलम का मानना है कि—

  • मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है
  • एक भी पात्र नागरिक का नाम कटना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन होगा
  • समयसीमा बढ़ाना यदि पारदर्शिता और शुद्धता के लिए जरूरी है, तो यह सकारात्मक कदम है

📢 चुनाव समय पर हों, लेकिन मतदाता सूची शत-प्रतिशत सही हो—यही लोकतंत्र की असली जीत है।


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