🏫 परिषदीय विद्यालयों में गुणवत्ता सुधार की नई पहल: ‘पिलर फ्रेमवर्क’ से बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर
✍️ सरकारी कलम | विशेष रिपोर्ट
लखनऊ।
परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने और शिक्षकों व अधिकारियों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से बेसिक शिक्षा विभाग अब ‘पिलर फ्रेमवर्क’ को लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह फ्रेमवर्क पांच चरणों में लागू किया जाएगा, जिससे विद्यालय स्तर पर पढ़ाई की वास्तविक स्थिति को समझकर ठोस सुधार किए जा सकें। 📚✨
🔹 पहला चरण: साझा कार्ययोजना से होगी शुरुआत
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार, पहले चरण में खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) मिलकर हर महीने विद्यालय भ्रमण की साझा कार्ययोजना तैयार करेंगे।
👉 उद्देश्य यह है कि निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता न रहकर, शैक्षिक सुधार का जरिया बने।
👉 कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों की पहचान कर वहां विशेष शैक्षिक हस्तक्षेप किए जाएंगे।
🔹 दूसरा चरण: पढ़ाई की जमीनी हकीकत का आकलन
दूसरे चरण में कक्षाओं में चल रही वास्तविक शिक्षण प्रक्रिया, बच्चों की सीखने की क्षमता और शिक्षण सामग्री के प्रभाव का गहराई से मूल्यांकन किया जाएगा।
📌 इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कागजों में दिख रही प्रगति और जमीनी हकीकत में कितना अंतर है।
🔹 तीसरा व चौथा चरण: समस्याओं का समाधान
पिलर फ्रेमवर्क के चौथे चरण में
- 🏫 विद्यालय स्तर
- 🏘️ संकुल स्तर
- 🏢 खंड (BEO) स्तर
पर सामने आने वाली समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान किया जाएगा, ताकि छोटी-छोटी दिक्कतें बड़े संकट में न बदलें।
🔹 पांचवां चरण: समीक्षा और नई रणनीति
पांचवें चरण में अब तक हुई प्रगति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी और उसी के आधार पर आगे की रणनीति तय होगी।
👉 इससे यह सुनिश्चित होगा कि सुधार प्रक्रिया निरंतर और प्रभावी बनी रहे। 📊
👩🏫 शिक्षकों के लिए क्या है संदेश?
‘पिलर फ्रेमवर्क’ से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि विभाग
- शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव नहीं,
- बल्कि सहयोग, मार्गदर्शन और अकादमिक सपोर्ट पर जोर देना चाहता है।
यदि इसे सही भावना से लागू किया गया, तो यह फ्रेमवर्क शिक्षकों और अधिकारियों के बीच विश्वास और समन्वय को मजबूत करेगा। 🤝
✍️ सरकारी कलम की राय
परिषदीय विद्यालयों में सुधार के लिए योजनाओं की कमी नहीं रही, लेकिन क्रियान्वयन और फॉलोअप हमेशा कमजोर कड़ी रहा है।
👉 पिलर फ्रेमवर्क तभी सफल होगा जब इसे
- कागजी खानापूर्ति नहीं,
- बल्कि शिक्षक हितैषी और छात्र केंद्रित सोच के साथ लागू किया जाए।
📌 अब देखने वाली बात यह होगी कि यह फ्रेमवर्क व्यवस्था में वास्तविक बदलाव लाता है या एक और रिपोर्ट बनकर रह जाता है।
— सरकारी कलम | शिक्षकों की आवाज 🖊️📖
