🖊️ सरकारी कलम विशेष रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) में माइग्रेशन पॉलिसी लागू करने समेत कई अहम मांगों को लेकर सोमवार को प्रतियोगी छात्रों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। पहले से घोषित कार्यक्रम के तहत सैकड़ों अभ्यर्थी सुबह से ही प्रयागराज स्थित आयोग मुख्यालय पर एकत्र हो गए। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रतियोगी मुख्य मार्ग पर धरने पर बैठ गए और पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। 🚨
🔥 क्या हैं प्रतियोगियों की मुख्य मांगें?
आंदोलन में शामिल प्रतियोगियों का कहना है कि आयोग की नीतियां पारदर्शिता के सिद्धांत के खिलाफ जा रही हैं। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं 👇
- ✅ माइग्रेशन पॉलिसी (Migration Rule) को पूरी तरह लागू किया जाए
- 📊 आरओ-एआरओ 2023 की संशोधित उत्तर कुंजी जारी की जाए
- 📑 श्रेणीवार कटऑफ और अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक किए जाएं
- 📝 पीसीएस मुख्य परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्रों की उत्तर कुंजी जारी हो
- 🎯 पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में पदों के सापेक्ष 15 गुना अभ्यर्थियों को क्वालिफाई किया जाए
हालांकि, आयोग पर पहुंचे अधिकांश छात्रों का कहना था कि उनका मुख्य मुद्दा माइग्रेशन नियमों को लागू करना और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
⚖️ माइग्रेशन नियम पर क्यों भड़के प्रतियोगी?
प्रतियोगियों ने बताया कि 10 दिसंबर 2019 को आयोग की बैठक में आरक्षण से जुड़ा एक निर्णय लिया गया था। इसके तहत अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को उनकी ही श्रेणी में रखा जा रहा है, जबकि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में ऐसा नहीं होता।
👉 इसी का परिणाम है कि:
- PCS-2022 और PCS-2023 में
- OBC और EWS का कटऑफ
- अनारक्षित (General) वर्ग से भी अधिक चला गया
प्रतियोगियों का कहना है कि यह संवैधानिक भावना और समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ है।
📉 कटऑफ के आंकड़े जो सवाल खड़े करते हैं
प्रतियोगियों ने कुछ उदाहरण भी गिनाए:
- RO/ARO-2015 : 129 / 132
- AE-2019 : 137 / 152 / 165
- RO/ARO-2021 : 102 / 106 / 110
- PCS-2022 : 111 / 114 / 114
- PCS-2023 : 125 / 129 / 128
👉 इन आंकड़ों के आधार पर प्रतियोगियों की मांग है कि EWS, OBC, SC, ST एवं अन्य वर्गों के लिए माइग्रेशन कैप (Migration Cap) ओपन किया जाए, जैसा कि BPSC में किया जाता है।
🚔 पुलिस कार्रवाई और झड़प
करीब 12 बजे जब प्रतियोगी आयोग गेट के सामने धरने पर बैठ गए, तो सिविल लाइंस बस अड्डे की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग बंद हो गया। इससे लंबा जाम लग गया। पुलिस ने पहले वाहनों को डायवर्ट किया और बाद में प्रतियोगियों को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।
इस दौरान:
- कई छात्रों को चोटें आईं 🤕
- एक छात्र को पुलिस द्वारा घसीटे जाने का आरोप
- मौके पर RAF के जवान भी तैनात रहे
इन घटनाओं से प्रतियोगियों की नाराजगी और बढ़ गई और जमकर नारेबाजी हुई।
🏠 छात्र नेता नजरबंद, आंदोलन बंटा दो खेमों में
आंदोलन की अगुवाई करने वाले कई छात्र नेताओं — जैसे पंकज पांडेय, आशीष आदि — को पुलिस ने पहले ही नजरबंद कर दिया था। वहीं आशुतोष पांडेय अस्पताल में भर्ती रहे।
राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका के चलते:
- कुछ प्रतियोगी आंदोलन से अलग हो गए
- कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई
संयुक्त प्रतियोगी छात्र हुंकार मंच और प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि कुछ मांगें उनके पूर्व घोषित आंदोलन का हिस्सा नहीं थीं।
🗣️ संगठनों की प्रतिक्रिया
- प्रशांत पांडेय (मीडिया प्रभारी) ने कहा कि राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के आने से भ्रम की स्थिति बनी
- अवनीश पांडेय ने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ राजनीति नहीं होनी चाहिए
- AISA प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार ने प्रतियोगियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की
✍️ सरकारी कलम की टिप्पणी
📌 प्रतियोगी छात्रों की मांगें न तो असंवैधानिक हैं और न ही अव्यवहारिक। माइग्रेशन पॉलिसी को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, उनका समाधान पारदर्शिता और संवाद से ही संभव है।
यदि आयोग समय रहते:
- नियम स्पष्ट करे
- कटऑफ और अंक सार्वजनिक करे
- UPSC/BPSC जैसी पारदर्शी व्यवस्था अपनाए
तो न केवल विवाद समाप्त होगा, बल्कि आयोग की साख भी मजबूत होगी।
⚠️ मांगें न माने जाने की स्थिति में प्रतियोगियों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। ऐसे में अब गेंद आयोग के पाले में है।
📢 सरकारी कलम प्रतियोगी छात्रों की न्यायपूर्ण मांगों के साथ खड़ा है। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल छात्रों का हक ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की भी ज़रूरत है।
