🔥 बीटीसी अंकतालिकाओं की चोरी का बड़ा खुलासा: 1500 से अधिक शिक्षक फंसे, डायट की लापरवाही उजागर!
— सरकारी कलम विशेष रिपोर्ट
प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में हड़कंप मचाने वाला मामला सामने आया है। बीटीसी (1999, 2004, 2007 और 2008 बैच) की मूल अंकतालिकाएं डायट से चोरी हो गईं, और इस चोरी ने फिरोजाबाद, सुल्तानपुर, जौनपुर, अयोध्या सहित कई जिलों के लगभग 1500 शिक्षकों को संकट में डाल दिया है।
📌 फिरोजाबाद के लगभग 1000 शिक्षक
📌 अन्य जिलों के लगभग 500 शिक्षक
इतने बड़े स्तर पर हुई यह चोरी अब गंभीर रूप ले रही है—और सबसे अहम सवाल है: जिम्मेदार कौन?
🚨 चोरी का खुलासा कैसे हुआ?
सालों तक दबा यह मामला टीईटी / सी-टेट आवेदन के दौरान सामने आया। नई अनिवार्यता के अनुसार शिक्षकों को आवेदन में अंकतालिका (Marksheet) अपलोड करनी थी।
जब शिक्षक अपनी मूल अंकतालिका निकलवाने डायट पहुंचे, तब हकीकत का पता चला:
❗ अंकतालिकाएं चोरी हो चुकी थीं!
अगर आवेदन में अंक अपलोड करना अनिवार्य न होता—तो संभव है कि यह चोरी कई वर्षों तक छिपी ही रहती।
यानी यह अनिवार्यता ही असल में सच सामने लाने की वजह बनी।
🏫 डायट की लापरवाही उजागर — FIR तक नहीं!
डायट प्राचार्य बृजेंद्र कुमार ने 24 जून 2024 को नियामक प्राधिकरण को पत्र भेजकर चोरी की सूचना दी थी।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है—
❌ नारखी थाने में कोई एफआईआर दर्ज ही नहीं कराई गई!
यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि:
- इतनी बड़ी चोरी पर डायट प्रशासन चुप क्यों रहा?
- एफआईआर दर्ज न कराना क्या किसी बड़ी गड़बड़ी को छिपाने की कोशिश है?
- क्या अंकतालिकाओं की सुरक्षा का कोई सिस्टम ही नहीं था?
😡 1500 से ज्यादा शिक्षकों का भविष्य अधर में
अंकतालिका के बिना शिक्षक—
✔ सी-टेट का फॉर्म नहीं भर पा रहे
✔ प्रमोशन/नई नियुक्ति पर असर
✔ कई का करियर सीधे प्रभावित
शिक्षकों का गुस्सा और रोष स्वाभाविक है।
लगता है कि जिन्हें व्यवस्था का सहारा देना था, वहीं व्यवस्था उनकी सबसे बड़ी समस्या बन गई।
🔍 चोरी या किसी अंदरूनी गड़बड़ी?
शिक्षा जगत में अब कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं:
- क्या यह सामान्य चोरी है या रिकॉर्ड छिपाने की किसी बड़े खेल की शुरुआत?
- क्या पुराने बैचों की कापियां और अभिलेख पहले से असुरक्षित थे?
- क्या इस मामले को जानबूझकर दबाया गया?
जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होती, इन सवालों के जवाब मिलना मुश्किल है।
🗣️ शिक्षकों की मांग — “जांच हो, FIR हो, नई अंकतालिकाएं जारी हों”
शिक्षक संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं:
1️⃣ तुरंत एफआईआर दर्ज कराई जाए
2️⃣ जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
3️⃣ बिना देरी सभी पीड़ित शिक्षकों को डुप्लीकेट अंकतालिका जारी की जाए
4️⃣ सी-टेट आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए
5️⃣ पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो
🧾 सरकारी कलम की राय
यह मामला सिर्फ अंकतालिकाओं का नहीं—
👉 यह शिक्षा तंत्र की सुरक्षा और पारदर्शिता का सवाल है
👉 यह 1500 परिवारों के भविष्य का सवाल है
👉 यह बताता है कि प्रशासनिक स्तर पर कितनी बड़ी लापरवाही हो रही है
सरकार और प्रशासन को तुरंत दखल देना चाहिए, ताकि—
🟢 शिक्षक लटके हुए भविष्य से बाहर निकलें
🟢 जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो
🟢 ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों
📌 निष्कर्ष
बीटीसी अंकतालिकाओं की चोरी प्रदेश में बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
“फाइलों में दबा सच” आखिर उजागर हो चुका है। अब देखना यह है कि—
क्या सरकार पीड़ित शिक्षकों को न्याय दिला पाएगी, या मामला फिर किसी फाइल में दबकर रह जाएगा?
