⚖️ टीजीटी भर्ती 2021 में दो सवालों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मामला विशेषज्ञ समिति को भेजा, चयनित शिक्षकों पर असर नहीं


⚖️ टीजीटी भर्ती 2021 में दो सवालों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मामला विशेषज्ञ समिति को भेजा, चयनित शिक्षकों पर असर नहीं

— सरकारी कलम विशेष रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीजीटी भर्ती-2021 के विवादित प्रश्नों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि दो प्रश्नों के गलत उत्तर की जांच अब विषय विशेषज्ञ समिति करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिन अभ्यर्थियों के अंक बढ़ेंगे, उन्हें भी नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

सबसे राहत की बात ये है कि कोर्ट ने साफ कहा:

✅ इसका असर पहले से चयनित या नियुक्त शिक्षकों पर नहीं पड़ेगा।


📝 मामला क्या था?

उप्र माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड ने वर्ष 2021 में टीजीटी भर्ती का विज्ञापन जारी किया था।

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  • परीक्षा हुई
  • बोर्ड ने 10 अगस्त 2021 को उत्तर कुंजी जारी की
  • कई अभ्यर्थियों ने उत्तर कुंजी के कुछ सवालों पर आपत्ति की
  • बोर्ड ने पुनरीक्षित उत्तर कुंजी जारी की

इसके बावजूद कला, इतिहास, होम साइंस और सोशल साइंस विषयों के कई प्रश्नों पर अभ्यर्थी कोर्ट पहुंचे।

याचिका में दावा था कि दो सवालों के उत्तर अब भी गलत थे।


👨‍⚖️ हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने:

  • दो विवादित सवालों पर अभ्यर्थियों की आपत्तियों को उचित मानते हुए
  • पूरा मामला विषय विशेषज्ञ समिति को भेजने का निर्देश दिया
  • समिति से रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा
  • और निर्देश दिया कि यदि अंक बढ़ते हैं तो 👉 उन उम्मीदवारों को भी चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए

यह आदेश कृष्ण कुमार बनाम उप्र चयन बोर्ड मामले में सुनाया गया।


👥 किन अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की?

कई अभ्यर्थियों ने इस मामले पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था:

  • 🎨 कला विषय – 22 अभ्यर्थी
  • 🧵 होम साइंस – 4 अभ्यर्थी
  • 🌍 सोशल साइंस – 7 अभ्यर्थी

इन अभ्यर्थियों का दावा था कि गलत उत्तरों के कारण उनके अंक कम हो गए और वे चयन सूची से बाहर हो गए।


🛡️ चयनित शिक्षकों को राहत

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि

❗ इस आदेश का प्रभाव पहले से चयनित या नियुक्त टीजीटी शिक्षकों पर नहीं पड़ेगा।

अर्थात — किसी का चयन रद्द नहीं होगा, किसी को हटाया नहीं जाएगा।

यह महत्वपूर्ण बयान है, क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों में चयनित और नियुक्त शिक्षकों में असुरक्षा बढ़ जाती है।


📌 सरकारी कलम की राय

यह फैसला दो चीज़ें स्पष्ट करता है:
1️⃣ भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता जरूरी है
2️⃣ अभ्यर्थियों की शिकायतें अगर तथ्यपरक हों तो कोर्ट उन्हें गंभीरता से सुनता है

विशेषज्ञ समिति का निर्णय अब इस विवाद का अंतिम समाधान बनेगा।
उम्मीद है कि अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा और चयन प्रक्रिया और मजबूत होगी।


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