🌍 WHO–विश्व बैंक की रिपोर्ट: स्वास्थ्य खर्च ने 1.6 अरब लोगों को धकेला अत्यधिक गरीबी में, 4.6 अरब लोगों को अभी भी नहीं मिल रही ज़रूरी स्वास्थ्य सेवा
✍️ सरकारी कलम | International Health Report
दुनियाभर में स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च इतना बढ़ गया है कि 1.6 अरब लोग अत्यधिक गरीबी में पहुंच चुके हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विश्व बैंक की संयुक्त रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि अरबों लोग या तो स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच नहीं पा रहे हैं या उनकी भारी लागत वहन करने में असमर्थ हैं।
रिपोर्ट के अनुसार—
➡️ 4.6 अरब लोगों को अभी भी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएँ नहीं मिल रहीं।
➡️ 2.1 अरब लोग स्वास्थ्य सेवाएँ लेते समय आर्थिक संकट झेल रहे हैं।
यह आंकड़े बताते हैं कि यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) का सपना अभी भी दुनिया के एक बड़े हिस्से के लिए दूर है। 🌐💔
🩺 2000 से 2023 तक सुधार, लेकिन चुनौतियाँ अभी भी विशाल
रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दो दशकों में कई देशों ने
✔️ स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाया
✔️ और स्वास्थ्य खर्च के बोझ को कुछ कम किया है
हेल्थ सर्विस कवरेज इंडेक्स 2000 में 54 अंक था, जो 2023 में बढ़कर 71 अंक हो गया है।
📌 यानी प्रगति हुई है, लेकिन इसकी गति दुनिया भर की जरूरतों की तुलना में अभी भी बहुत धीमी है।
💊 दवाओं पर सबसे ज्यादा खर्च — दुनिया भर में स्वास्थ्य खर्च का 55% हिस्सा
रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाएँ लेने में लोगों को होने वाली वित्तीय परेशानी का सबसे बड़ा कारण दवाओं का महंगा होना है।
दुनियाभर में 75% देशों में कुल स्वास्थ्य खर्च का 55% हिस्सा सिर्फ दवाओं पर खर्च होता है।
यह स्थिति गरीब, ग्रामीण और कम शिक्षित आबादी को और अधिक प्रभावित करती है।
🇮🇳 भारत की स्थिति: 30.9% लोग स्वास्थ्य खर्च से आर्थिक संकट में
भारत जैसे विकासशील देश में यह समस्या और गहरी है। रिपोर्ट के मुताबिक—
➡️ 30.9% भारतीय स्वास्थ्य खर्च के कारण आर्थिक संकट का सामना करते हैं।
➡️ स्वास्थ्य खर्च का बोझ 33.6% भारतीय परिवारों की जेब पर भारी पड़ता है।
➡️ बांग्लादेश में यह आंकड़ा 41.7% और पाकिस्तान में 33.9% है।
भारत का हेल्थ कवरेज इंडेक्स 100 में से 69 अंक है — यानी सुधार हो रहा है, लेकिन अभी भी लंबा रास्ता बाकी है।
ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और कम शिक्षित लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
🚨 ** अरबों लोग, लेकिन स्वास्थ्य सुविधा नहीं — WHO की कड़ी चेतावनी**
WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा—
“यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज स्वास्थ्य के अधिकार का सबसे बड़ा उदाहरण है। लेकिन यह रिपोर्ट दिखाती है कि अरबों लोगों के लिए अभी भी यह अधिकार पहुंच से बाहर है। देशों को अपने स्वास्थ्य तंत्र में निवेश करना होगा ताकि वे अपनी जनता और अपनी अर्थव्यवस्था दोनों को सुरक्षित रख सकें।”
यह बयान साफ बताता है कि दुनिया स्वास्थ्य संकट के एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। अगर वैश्विक स्तर पर निवेश और नीतिगत सुधार नहीं हुए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
📌 निष्कर्ष: स्वास्थ्य सेवाएँ अब भी ‘अधिकार’ नहीं, बल्कि ‘लक्ज़री’ बन रही हैं
WHO–विश्व बैंक रिपोर्ट ने दुनिया की कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
दुनियाभर में—
▪️ अरबों लोग इलाज से वंचित
▪️ करोड़ों लोग इलाज के कारण कर्ज़ में
▪️ लाखों परिवार गरीबी में धकेले जा रहे हैं
भारत सहित गरीब और मध्यम-आय वाले देशों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है।
यदि सरकारें और स्वास्थ्य संस्थान इस स्थिति को नहीं सुधारते, तो यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज सिर्फ एक सपना बनकर रह जाएगा। 🏥💔
