❗ एक ही ब्रांड नाम, दवाएं अलग-अलग — मरीजों के लिए बड़ा खतरा
देश में अब एक बड़ी दवा-समस्या सामने आई है। कई फार्मा कंपनियां एक ही ब्रांड नाम से अलग-अलग तरह की दवाएं बेच रही हैं — कहीं दर्द की दवा उसी नाम से, कहीं बुखार की, तो कहीं एंटीबायोटिक।
👉 डॉक्टर एक ब्रांड लिख देते हैं
👉 मरीज वही नाम देखकर दवा ले आता है
👉 लेकिन फॉर्मुलेशन अलग होने पर गंभीर खतरा पैदा हो जाता है
इसी “ब्रांड एक्सटेंशन प्रैक्टिस” पर अब केंद्र सरकार कड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।
📢 राज्यों ने केंद्र को लिखा पत्र — “यह भ्रामक और खतरनाक है”
पिछले कुछ महीनों में कई राज्यों की दवा निगरानी इकाइयों और मरीज समूहों ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को शिकायतें भेजीं:
- एक ही ब्रांड नाम से अलग दवा बेचना
- मरीजों में भारी भ्रम
- गलत दवा लेने की घटनाओं में इज़ाफ़ा
- ब्रांड प्रमोशन के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़
राज्यों ने इसे मरीज सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया है।
🏛️ केंद्र सरकार की तैयारी: अब आएगी सख्त पॉलिसी
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार जल्द ही नई नीति और नया नियमन लागू कर सकती है।
सरकार जिन कदमों पर विचार कर रही है:
🔹 1. एक ही ब्रांड नाम से कई फॉर्मुलेशन पर प्रतिबंध
या तो
- इसे पूरी तरह बंद किया जाएगा, या
- बहुत सीमित किया जाएगा।
🔹 2. नए ब्रांड नामों की मंजूरी के लिए कड़े मानक
किसी भी नई दवा को बाजार में लाने से पहले सख्त नियम लागू होंगे।
🔹 3. अधिनियम 96 में संशोधन
दवा नियमों में कानूनी परिवर्तन कर प्रैक्टिस को नियंत्रित किया जाएगा।
🔹 4. मिसलीडिंग ब्रांड पर कार्रवाई
- जुर्माना
- लाइसेंस रद्द
- मार्केट से तत्काल हटाना जैसे कदम शामिल होंगे।
🔹 5. मरीज सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट किया कि भ्रमित करने वाली दवा किसी भी हालत में मरीज तक न पहुंचे — यही नीति का मुख्य लक्ष्य होगा।
🧑⚕️ विशेषज्ञों, फार्मा कंपनियों और राज्यों के साथ बड़ी बैठक की तैयारी
केंद्र जल्द ही एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाएगा जिसमें शामिल होंगे:
- फार्मा उद्योग
- दवा विशेषज्ञ
- राज्यों के ड्रग कंट्रोल विभाग
- उपभोक्ता संगठन
इन सभी से राय लेकर अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
🩺 सरकारी कलम का विश्लेषण
यह कदम भारत की दवा प्रणाली में एक बड़ा सुधार साबित हो सकता है।
एक ही नाम की कई दवाओं ने:
- मरीजों की सुरक्षा
- डॉक्टरों की प्रिस्क्राइबिंग
- और केमिस्ट की जिम्मेदारी
तीनों को मुश्किल बना दिया है।
यदि केंद्र सरकार इस पर सख्त रोक लगा देती है, तो दवा बाजार अधिक:
- पारदर्शी
- सुरक्षित
- और मरीज-हितैषी
बन सकेगा।
