अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में तबादला विवाद: मानव संपदा पोर्टल पर वेतन भुगतान को लेकर नया आदेश 🏫💻
अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक संस्थाओं में कार्यरत तकरीबन 2000 प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के हालिया तबादलों के बाद अब मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से वेतन भुगतान को लेकर बड़े स्तर पर असंतोष सामने आ रहा है। कई जिलों में कार्यभार ग्रहण करने के बावजूद शिक्षकों के वेतन नियमानुसार जारी नहीं किए जा रहे, जिसकी शिकायतें लगातार शिक्षा विभाग तक पहुंच रही हैं।
🔍 क्या है पूरा मामला?
शिक्षा निदेशालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार—
- 360 शिक्षक/प्रधानाचार्य ऑनलाइन स्थानांतरित हुए हैं
- जबकि लगभग 1600 का स्थानांतरण ऑफलाइन माध्यम से हुआ है
- सभी ने अपने-अपने नवीन विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण कर लिया है
इसके बावजूद कई जिलों में मानव संपदा पोर्टल पर स्थिति अपडेट न होने के कारण शिक्षकों को वेतन भुगतान में दिक्कतें आ रही हैं।
🚫 शिक्षकों की शिकायतें क्या हैं?
कई शिक्षकों का कहना है कि—
- कार्यभार ग्रहण कर लेने के बावजूद पुराने जिले के अधिकारी पोर्टल अपडेट नहीं कर रहे
- जिसके कारण उनका वेतन रुका हुआ है या गलत जिले में दिख रहा है
- कुछ जगहों पर वेतन भुगतान के लिए अनावश्यक दस्तावेज और समय की मांग की जा रही है
इस स्थिति से शिक्षक वर्ग काफी परेशान है।
📝 अपर शिक्षा निदेशक का सख्त निर्देश
अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) सुरेंद्र कुमार तिवारी ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं:
📌 महत्वपूर्ण बिंदु:
- एक शिक्षक का वेतन दो जिलों से नहीं दिया जा सकता।
- स्थानांतरित शिक्षकों का वेतन उनकी पूर्व कार्यरत संस्था के ‘लास्ट पे सर्टिफिकेट (LPC)’ के आधार पर देना होगा।
- नवीन जनपद के DIOS को यह सुनिश्चित करना होगा कि पूरा महीने का वेतन समय पर जारी हो।
- मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षक की ज्वाइनिंग स्थिति जल्द से जल्द अपडेट की जाए।
यह आदेश शिक्षकों की समस्याओं को देखते हुए तुरंत प्रभाव से लागू किया गया है।
💡 इस आदेश से शिक्षकों को क्या फायदा?
✔ वेतन भुगतान में तेजी आएगी
✔ मानव संपदा पोर्टल में गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया स्पष्ट होगी
✔ दो जिलों के बीच वेतन को लेकर जो भ्रम की स्थिति थी, वह खत्म होगी
✔ शिक्षक बिना मानसिक दबाव के नई तैनाती पर कार्य कर सकेंगे
📰 सार्वजनिक हित में महत्वपूर्ण कदम
शिक्षक शिक्षा व्यवस्था का आधार हैं। स्थानांतरण के बाद वेतन जैसी मूलभूत आवश्यकता में देरी होना न सिर्फ उनके मनोबल को प्रभावित करता है, बल्कि पूरे शैक्षणिक वातावरण पर असर डालता है।
अपर शिक्षा निदेशक का यह आदेश निस्संदेह शिक्षकों के हित में और व्यवस्था सुधार की दिशा में एक स्वागतयोग्य कदम है।
सरकारी कलम इस मुद्दे पर आगे भी हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा। ✍️📢
