पीएमश्री योजना में यूपी की धीमी प्रगति: 614 करोड़ के बजट में से केवल 8 करोड़ खर्च, कई जिलों में एजेंसियां निष्क्रिय
✍️ सरकारी कलम | शिक्षा विशेष रिपोर्ट
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (PM SHRI) योजना यूपी में फाइलों और कागजों में अटकती दिखाई दे रही है। प्रदेश को शिक्षा सुविधाओं को नई ऊंचाई देने के लिए मिले 614 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में से अब तक सिर्फ 8 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं।
यह स्थिति न सिर्फ चिंताजनक है बल्कि एजेंसियों की कार्यशैली और जिला स्तर की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। 🚨
📌 1710 स्कूलों का चयन — पर प्रगति बेहद धीमी
प्रदेश में —
- 1565 बेसिक विद्यालय
- 145 माध्यमिक विद्यालय
कुल 1710 स्कूल पीएमश्री योजना के तहत चयनित किए गए हैं।
योजना का उद्देश्य इन स्कूलों को स्मार्ट, आधुनिक, डिजिटल और सुरक्षित मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करना है।
लेकिन वास्तविकता यह है कि…
👉 2025-26 के लिए केंद्र ने स्वीकृत किए 614 करोड़
👉 जिलों को जारी हुए 98 करोड़
❌ खर्च हुए केवल 8 करोड़!
इस स्थिति से शासन स्तर पर नाराजगी स्वाभाविक है।
📌 कार्यदायी संस्थाओं की हालत – 1661 में से सिर्फ 766 सक्रिय
समग्र शिक्षा विभाग के अनुसार— कुल कार्यदायी संस्थाएं सक्रिय संस्थाएं सक्रियता प्रतिशत 166176646.67%
यानि आधे से ज्यादा संस्थाएं या तो काम शुरू ही नहीं कर रहीं या बेहद सुस्त हैं।
📌 बेसिक शिक्षा विभाग ने जताई कड़ी नाराजगी
हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने साफ कहा—
- काम अत्यंत धीमी गति से चल रहा
- बजट के उपयोग में लापरवाही
- जिलों में एजेंसियों का तालमेल बेहद कमजोर
- कई जिलों में एक भी संस्था सक्रिय नहीं
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि —
✔️ समय से बजट खर्च नहीं हुआ तो कड़ी कार्रवाई तय है।
📌 इन जिलों में सभी एजेंसियां सक्रिय (प्रगति संतोषजनक)
✔️ अंबेडकरनगर
✔️ सुल्तानपुर
✔️ अलीगढ़
✔️ औरैया
✔️ बागपत
✔️ बलिया
✔️ फर्रुखाबाद
✔️ फतेहपुर
✔️ अमरोहा
✔️ पीलीभीत
✔️ संतकबीर नगर
✔️ श्रावस्ती
✔️ सोनभद्र
📌 इन जिलों में एक भी एजेंसी सक्रिय नहीं (अत्यंत चिंताजनक)
❌ लखनऊ
❌ बहराइच
❌ गोंडा
❌ भदोही
❌ फिरोजाबाद
❌ कन्नौज
❌ कानपुर देहात
❌ कासगंज
❌ महराजगंज
❌ मथुरा
❌ मेरठ
ये वे जिले हैं जहां विकास कार्यों की शुरुआत भी नहीं हो सकी है।
📌 PM SHRI के तहत बढ़ाई जानी हैं ये सुविधाएं
योजना के तहत चयनित स्कूलों में निम्न सुविधाएं विकसित की जानी हैं—
✨ इंटरनेट सुविधा
✨ कंप्यूटर एवं ICT लैब
✨ स्मार्ट क्लासरूम
✨ डिजिटल लाइब्रेरी
✨ आधुनिक फर्नीचर
✨ वोकेशनल शिक्षा
✨ इंटीग्रेटेड साइंस लैब
✨ लड़कियों के लिए सुरक्षित शौचालय
✨ ग्रीन स्कूल कॉन्सेप्ट
✨ साफ पेयजल
✨ शिक्षकों का क्षमता विकास
✨ छात्र ट्रैकिंग प्रणाली
✨ सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण
✨ टीएलएम सामग्री
इनमें से अधिकांश कार्य कागजों में हैं, जमीन पर नहीं।
📌 शासन के सख्त निर्देश — तेजी लाएं, नहीं तो कार्रवाई
बेसिक शिक्षा विभाग ने साफ कहा है कि:
❗ बजट पड़े-पड़े वापस न लौटे
❗ कार्यदायी संस्थाएं तुरंत साइट पर काम शुरू करें
❗ जिलाधिकारी प्रगति रिपोर्ट हर सप्ताह भेजें
❗ सुस्ती पर दंडात्मक कार्रवाई होगी
📢 निष्कर्ष — पीएमश्री की सफलता जिलों की सक्रियता पर निर्भर
योजना देश के सरकारी विद्यालयों को नए युग की शिक्षा सुविधाओं से लैस करने का सपना है।
लेकिन यूपी में मौजूदा स्थिति बताती है कि—
➡️ बजट है
➡️ चयनित विद्यालय हैं
➡️ योजनाएं बनी हुई हैं
पर जमीन पर काम की रफ्तार बेहद धीमी है।
यदि जिला प्रशासन और कार्यदायी एजेंसियां सक्रिय नहीं होतीं तो
✔️ बजट वापस जा सकता है
✔️ छात्रों को आधुनिक सुविधाएं मिलने में देरी होगी
✔️ योजना का पूरा उद्देश्य प्रभावित होगा
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