35 हज़ार शिक्षकों को पुरानी पेंशन देने की मांग तेज़ ❗| विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने किया बड़ा कदम | अपर मुख्य सचिव ने दिया सकारात्मक आश्वासन
उत्तर प्रदेश के लगभग 35 हजार 2004 बैच के शिक्षक लंबे समय से पुरानी पेंशन (OPS) की मांग कर रहे हैं। बुधवार को यह मुद्दा दोबारा जोर पकड़ गया जब विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं।
अपर मुख्य सचिव ने इस पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। 🙏
🔷 एक ही विज्ञापन से नियुक्ति, फिर भी OPS में भेदभाव क्यों?
भाजपा शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक व एमएलसी श्रीचंद शर्मा के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि:
- 2004 बैच के सभी शिक्षक एक ही विज्ञापन के आधार पर नियुक्त हुए थे
- फिर भी OPS देने में अनुचित भेदभाव किया जा रहा है
- कैबिनेट से प्रस्ताव पहले ही पास हो चुका है
- इसके बावजूद 35 हजार शिक्षक आज तक पुरानी पेंशन का लाभ नहीं पा सके हैं
प्रतिनिधिमंडल में शामिल
प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी
और महासचिव दिलीप चौहान
ने इस मुद्दे को तात्कालिक कार्रवाई के लिए रखा।
💢 शिक्षामित्र बोले — महंगाई में कैसे गुज़ारा करें?
बैठक में शिक्षामित्रों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रहे।
शिक्षामित्र संघ के महामंत्री सुशील यादव ने कहा:
- आज की महंगाई में शिक्षामित्रों का मानदेय बेहद कम है
- 3 जनवरी 2025 को जारी तबादला शासनादेश अब तक लागू नहीं हुआ
- हजारों शिक्षामित्र 80–90 किलोमीटर दूर कार्य करने को मजबूर हैं
- परिवार के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का आदेश जल्द जारी होना चाहिए
उनका कहना था कि अगर सरकार वास्तव में शिक्षामित्रों का सम्मान चाहती है, तो उन्हें आर्थिक सुरक्षा और पारिवारिक चिकित्सा सुविधा तुरंत दी जानी चाहिए। 💔
🔶 अनुदेशकों ने भी रखी अपनी समस्याएँ
प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारी बाद में विशेष सचिव अवधेश तिवारी और महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी से भी मिले।
यहाँ अनुदेशकों (Instructors) की समस्याओं, सेवा शर्तों और कार्यस्थल से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
📌 सरकारी कलम की विशेष टिप्पणी (शिक्षकों के हित में)
✔️ 35 हजार शिक्षकों का OPS मुद्दा अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है
✔️ शिक्षक समाज में गहरी नाराज़गी है कि कैबिनेट से मंजूरी के बावजूद लाभ नहीं दिया गया
✔️ शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की समस्याएँ भी वास्तविक हैं—मानदेय, दूरी और चिकित्सा जैसी मूलभूत चुनौतियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता
✔️ सरकार का सकारात्मक रुख स्वागतयोग्य है, लेकिन अब कार्रवाई ज़रूरी है, क्योंकि शिक्षक वर्षों से सिर्फ आश्वासन ही सुन रहे हैं
