PM श्री (PM SHRI) स्कूल्स में सरकारी-निजी युग्मन/मर्ज — क्या यह सरकारी स्कूलों का अंत है? 🏫🔗
एक सरकारी आदेश, एक बड़ी नीति और उससे उठते सवाल — लोकतांत्रिक शिक्षा का भविष्य किस दिशा में जा रहा है? ⚖️📚
परिप्रेक्ष्य: PM श्री और ‘ट्विनिंग/पेयरिंग’ क्या है? 🤔
हालिया सरकारी परिपत्रों और निर्देशों के अनुसार PM SHRI जैसे मान्यता प्राप्त (PM Shri/पीएमश्री) सरकारी विद्यालयों का ट्विनिंग/पेयरिंग निजी विद्यालयों, उच्च शिक्षा संस्थानों या विश्वविद्यालयों के साथ कराना प्रस्तावित है। इसका मकसद बताया जाता है — संसाधनों का साझा उपयोग, अध्यापक प्रशिक्षण, और बुनियादी ढांचे में सहयोग। लेकिन हर नीति की तरह इसके भी फायदे और चिंताएँ हैं।
सरकार क्या कह रही है — औपचारिक लाभ ✨
- संसाधन साझा करना: प्रयोगशाला, पुस्तकालय और डिजिटल सुविधाओं का लाभ। 📚💻
- शिक्षक कौशल विकसित करना: निजी संस्थानों से प्रशिक्षण और आधुनिक शिक्षण पद्धतियाँ। 👩🏫🔄
- व्यावहारिक सहयोग: प्रतियोगिताएँ, वर्कशॉप और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए अनुभव आधारित शिक्षा। 🧪🎭
परिवर्तन की चिंताएँ — क्या सरकारी स्कूलों का अंत नज़दीक है? ⚠️
हालांकि उपरोक्त बिंदु आकर्षक लगते हैं, कई शिक्षाविदों, अभिभावकों और शिक्षकों में यह भय भी उभर रहा है कि यह कदम सरकारी शिक्षा की पहचान और सार्वभौमिकता को कमजोर कर सकता है। मुख्य चिंताएँ हैं:
- निजीकृत पाठ्यक्रम का फैलाव: स्थानीय और समावेशी पाठ्यक्रम के स्थान पर बाजारोन्मुख पाठ्यक्रम का दबदबा बढ़ सकता है।
- समानता का खतरा: जो बच्चे सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें निजी सहयोग की शर्तों के कारण वंचित किया जा सकता है।
- स्वायत्तता में कमी: सरकारी स्कूलों की निर्णय लेने की स्वतंत्रता निजी भागीदारों के प्रभाव में आ सकती है।
निष्कर्ष: यदि नियम, निगरानी और पारदर्शिता नहीं होंगे तो यह ‘सहयोग’ धीरे-धीरे ‘विलय’ बनकर सरकारी अधिकार-क्षेत्र को सीमित कर सकता है।
व्यावहारिक उदाहरण — क्या हुआ तो क्या बदल सकता है? 🔍
मान लें कि एक सरकारी प्राथमिक स्कूल को पास के प्राइवेट स्कूल के साथ युग्मित किया गया। शुरुआत में बच्चों को बेहतर लैब, खेलकूद सुविधाएँ और शिक्षक प्रशिक्षण मिलते हैं — यह सकारात्मक है। परंतु अगर अगले चरण में फीस संरचना, भर्ती मानदंड या पाठ्यपुस्तक विकल्प निजी मानदंडों के अनुरूप बदलने लगें, तो सामाजिक-सार्वजनिक उद्देश्य प्रभावित होगा।
हमारे क्या सुझाव होने चाहिए? — एक संतुलित रास्ता 🛤️
नीति को न्यायोचित और टिकाऊ बनाने के लिए कुछ जरूरी उपाय:
- पारदर्शिता अनिवार्य करें: हर युग्मन अनुबंध सार्वजनिक हो और समुदाय की सहमति ली जाए। 📢
- सशक्त निगरानी तंत्र: शिक्षा गुणवत्ता और समावेशिता की नियमित ऑडिट हो। ✔️
- न्यायसंगत शर्तें: निजी भागीदारों को शुल्क व वाणिज्यिक गतिविधियों से रोकें — शिक्षा सार्वजनिक हित में रहे। ⚖️
- स्थानीय भागीदारी: अभिभावक, पंचायत और शिक्षक संघों की भागीदारी सुनिश्चित हो। 👥
क्या यह ‘अंत’ है — या ‘नया रूप’? 🔄
यह एक अतिशयोक्ति होगा कि तुरंत ही “सरकारी स्कूलों का अंत” आ गया। पर यह सच भी है कि बिना नीतिगत सुरक्षा के यह कदम सरकारी शिक्षा की आत्मा को बदल सकता है। इसका निर्णय हमें सूझबूझ, समुदाय की भागीदारी और मजबूत नियमन से करना होगा — वरना बदलाव का लाभ केवल कुछ ही उठाएंगे।

