राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा और विकास में परिकर और समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अभिभावक और समुदाय का आगनबाड़ी केंद्र के साथ संवाद और सहयोग बच्चे के सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और समृद्ध बनाता है। समुदाय की सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रकार के सुझाव दिए गए है, जिसमें बाल मेला जैसे कार्यक्रमों का आयोजन शामिल है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्क की रूपरेखा बुनियादी शिथा 2022 के अनुसार, अभिभावक और शिक्षक के बीच सतत संवाद न केवल बच्चे की शैक्षिक यात्रा को बेहतर बनाता है, बल्कि बच्चे के समग्र विकास में भी योगदान देता है।
उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में दिनांक 14 नवंबर 2025 को राज्य के सभी को लोकेटेड आंगनबाड़ी केन्द्रों में “बाल मेले” का आयोजन कराया जाना है। इस सम्बन्ध में विवरण एवं निर्देश निम्नवत् है-
बाल मेला आयोजित किये जाने के उद्देश्यः-
बाल मेला के माध्यम से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को एक ऐसा मंग प्रदान किया जाएगा जिसमें आयोजित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उनकी रचनात्मकता और सृजनात्मकता को प्रोत्यादित करता है। बाल मेला
के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित है-
1. स्थानीय कला, संस्कृति, और परिवेश से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता और सूजनात्मकता
को प्रोत्साहित करना।
2. अभिभावकों और समुदाय की शैक्षिक प्रक्रिया में भागीदारी को प्रोत्साहित करना ।
3. खेल और गतिविधियों के माध्यम से औपचारिक शिक्षा के प्रति बच्यो और अभिभावकों की रुचि को बहाना ।
4. बच्चों के विकास, उनकी रुथियों, पसंद-नापसंद और आवश्यकताओं आदि के बारे में जनसामान्य को जागरुक
करना।
कार्यक्रम की रूपरेखा:-
चाल मेले का आयोजन दिनांक 14 नवम्बर 2025 को प्रत्येक को लोकेटेड आँगनबाड़ी केंद्र में किया जाएगा।
कार्यक्रम का नेतृत्य संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक, मोडल शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकत्री एवं ईसीसीई एजुकेटर द्वारा मिलकर किया जाएगा। कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में सभी वस्त्रों के अभिभावको, प्राम प्रधान पार्षद, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों एवं स्थानीय समुदाय के लोगों को पहले से ही आमंत्रित किया जाएगा एवं उनकी
उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।
