📢 एडेड स्कूलों को राजकीय दर्जा दिलाने के लिए शिक्षक संघ का एलान — ‘शोषण के खिलाफ आरपार की लड़ाई’

📢 एडेड स्कूलों को राजकीय दर्जा दिलाने के लिए शिक्षक संघ का एलान — ‘शोषण के खिलाफ आरपार की लड़ाई’
✍️ सरकारी कलम विशेष रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) ने असहाय और उपेक्षित एडेड विद्यालयों को राजकीय दर्जा दिलाने के लिए राज्यव्यापी संघर्ष आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। संघ ने कहा कि जब तक इन विद्यालयों को राजकीय नहीं बनाया जाएगा, तब तक शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को प्रबंधन के शोषण से मुक्ति नहीं मिल सकेगी।


🎯 तीन दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन से एलान

राजधानी लखनऊ के रामाधीन सिंह उत्सव भवन में सोमवार से शुरू हुए तीन दिवसीय अधिवेशन में यह बड़ा निर्णय लिया गया।
कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा, उपाध्यक्ष प्रभात यादव, संरक्षक डॉ. हरिप्रकाश यादव सहित बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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वक्ताओं ने कहा —

“शिक्षकों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। जब तक एडेड कॉलेजों को राजकीय दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक शोषण, वेतन असमानता और असुरक्षा बनी रहेगी।”


⚖️ सेवा सुरक्षा की धारा हटाए जाने पर नाराजगी

संघ नेताओं ने आरोप लगाया कि नए शिक्षा सेवा चयन आयोग कानून में सेवा सुरक्षा से जुड़ी धारा 12, 18 और 21 को हटा दिया गया है।
इससे शिक्षकों की नौकरी की गारंटी और सेवा शर्तें कमजोर हो गई हैं।
संघ ने कहा कि अब सेवा सुरक्षा की बहाली और पेंशन की मांग को लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।


💰 शिक्षकों को 40 हजार में आउटसोर्सिंग पर रखना अन्याय

अधिवेशन में यह भी खुलासा किया गया कि कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती आउटसोर्सिंग के माध्यम से मात्र ₹40,000 मासिक वेतन पर की जा रही है।
संघ ने कहा कि यह नीति शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक सम्मान — दोनों पर प्रहार है।


🔄 तबादला पाए शिक्षकों को तुरंत रिलीव करने के निर्देश

सम्मेलन के दौरान शिक्षकों ने यह भी शिकायत की कि कई डीआईओएस तबादला पाए शिक्षकों को रिलीव करने में आनाकानी कर रहे हैं।
इस पर अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक सुरेंद्र कुमार तिवारी ने सभी डीआईओएस को आदेश दिया है कि ऑफलाइन तबादला आदेशों का तत्काल पालन कराते हुए शिक्षकों को कार्यमुक्त और कार्यभार ग्रहण करवाया जाए।


🗣️ संरक्षक डॉ. हरिप्रकाश यादव का बयान

“पुरानी पेंशन खत्म कर दी गई है, भत्ते घटा दिए गए हैं और सदन में शिक्षक प्रतिनिधि मौन हैं। अब समय है कि हम अपनी आवाज बुलंद करें और शिक्षकों के अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरें।”


💡 सरकारी कलम की राय

एडेड विद्यालयों को राजकीय दर्जा दिलाने की यह मांग वर्षों पुरानी है। यदि इसे लागू किया जाता है, तो राज्य के हजारों शिक्षकों को वेतन समानता, सेवा सुरक्षा और प्रशासनिक न्याय मिलेगा।
सरकार को इस आंदोलन की भावनाओं को समझते हुए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।


📰 रिपोर्ट: सरकारी कलम टीम | स्थान: लखनऊ
📅 11 नवंबर 2025


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