🚨 सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: स्कूल, अस्पताल, स्टेशन व खेल परिसरों से हटाए जाएंगे लावारिस कुत्ते और मवेशी 🐕🐄
देशभर में लावारिस कुत्तों और मवेशियों से बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने आदेश दिया है कि —
“हर शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थलों से लावारिस कुत्तों को तुरंत हटाया जाए और उनके प्रवेश को रोकने के लिए उचित बाड़ लगाई जाए।”
⚖️ कौन-सी पीठ ने दिया आदेश:
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि अब किसी भी लापरवाही के लिए नगर निकाय और प्रशासनिक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराए जाएंगे।
🏫 आदेश की मुख्य बातें
- स्कूल, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के भीतर पाए जाने वाले सभी लावारिस कुत्तों को तुरंत हटाया जाए।
- हटाने के बाद उनकी नसबंदी और टीकाकरण कर उन्हें निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में रखा जाए।
- इन क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं को प्रशासनिक विफलता माना जाएगा।
- यह कदम संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों, खासकर बच्चों, मरीजों और खिलाड़ियों के जीवन व सुरक्षा की रक्षा के लिए है।
🦠 रेबीज और जनस्वास्थ्य पर चिंता
पीठ ने कहा कि भारत में रेबीज से होने वाली मौतों का बड़ा कारण लावारिस या घरेलू कुत्तों के काटने की घटनाएं हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हर साल 90% से अधिक रेबीज मौतें इन्हीं कारणों से होती हैं।
🚧 मवेशियों को भी हटाने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और सड़कों से लावारिस मवेशियों को तत्काल हटाने का आदेश दिया।
साथ ही कहा कि इन पशुओं को गोशालाओं या आश्रय गृहों में स्थानांतरित किया जाए।
राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा जारी निर्देशों को भी शीर्ष अदालत ने मंजूरी दी है।
⚠️ पालन न करने पर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने चेताया कि अगर आदेशों का पालन नहीं हुआ तो राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
सभी राज्यों को 8 सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।
अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को होगी।
🗣️ विरोध और प्रतिक्रिया
🐾 मेनका गांधी, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता ने आदेश को “अव्यावहारिक” बताया।
उनका कहना है —
“देश में इतने बड़े पैमाने पर कुत्तों को रखने के लिए पर्याप्त आश्रय स्थल नहीं हैं। अगर 8 लाख कुत्ते हैं, तो 5,000 को हटाने से कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा।”
वहीं सुप्रीम कोर्ट की वकील ननिता शर्मा ने उम्मीद जताई कि “बेजुबान जानवरों के साथ अन्याय नहीं होगा और आश्रय गृहों का सही रखरखाव किया जाएगा।”
📌 सारांश
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अब पूरे देश में पब्लिक सेफ्टी बनाम एनिमल राइट्स की नई बहस खड़ी कर रहा है।
जहाँ एक ओर लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर पशु प्रेमी इस आदेश को क्रूर और अव्यावहारिक बता रहे हैं।
