ब्रिटेन में बसा सहायक अध्यापक, भारत में चलती रही वेतन-वृद्धि — यूपी एटीएस ने दर्ज किया मुकदमा 🇬🇧📰
क्या है आरोपों का सार? ⚖️
यूपी एटीएस ने संतकबीरनगर में शमशुल हुदा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपों के अनुसार:
- वह ब्रिटेन में बस गया और कई देशों की यात्रा करते हुए इस्लाम प्रचार करता रहा। ✈️
- उसके पाकिस्तान में यात्रा-आगमन और वहां के लोगों से संपर्क की जानकारी एटीएस ने जांच में सामने रखी है। 🇵🇰
- भारत में उसके माध्यम से जम्मू-कश्मीर के कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में रहने जैसे पहलुओं पर भी जांच की जा रही है। 🕵️♂️
सरकारी रिकॉर्ड में क्या मिला? 🗂️
एटीएस की जांच में पाए गए प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं —
नियुक्ति: शमशुल हुदा खां को 12 जुलाई 1984 को मदरसा दारुल उलूम अहले, सुन्नत मदरसा अशरफिया मुबारकपुर (आजमगढ़) में सहायक अध्यापक (आलिया) के पद पर नियुक्त किया गया था।
विदेश प्रवास और नागरिकता: वह 2007 से ब्रिटेन में रह रहा था और 19 दिसंबर 2013 को ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त कर ली।
वेतन-वृद्धि और पेंशन: 2007 से 2017 तक उसकी सेवा पुस्तिका की जांच किए बिना प्रतिवर्ष वेतन वृद्धि प्रदान की गई। इसके बाद 1 अगस्त 2017 से उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दी गई और नियमों के विरुद्ध पेंशन स्वीकृत कर दी गई। ❗
एडीजी कानून-व्यवस्था का बयान
एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने बताया कि शमशुल हुदा खां ब्रिटेन की नागरिकता लेकर लगातार कई देशों में यात्रा करते हुए इस्लाम धर्म का प्रचार कर रहा था। एटीएस को प्राप्त सूचनाओं में उसके पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों के संपर्कों तथा भारत में उसके करीबी सम्पर्कों के जरिए जम्मू-कश्मीर के संदिग्ध व्यक्तियों से जुड़ाव का संकेत मिला — जिस आधार पर जांच की गई।
कठिन सवाल — नियमों पर क्या असर?
यह मामला कई प्रशासनिक और सुरक्षा-संबंधी प्रश्न उठाता है:
- किस प्रकार से सेवा पुस्तिका की अनदेखी की गई और वेतन-वृद्धियाँ बिना सत्यापन कैसे जारी रहीं?
- क्या संबंधित विभागों की जांच प्रक्रिया पर्याप्त और पारदर्शी थी?
- विदेश में स्थायी रूप से बसने वाले सरकारी कर्मचारियों के मामलों में नियमों की सख्ती कितनी प्रभावी है?
एटीएस की आगे की कार्रवाई
यूपी एटीएस ने संतकबीरनगर में मुकदमा दर्ज कर पूछताछ और डिजिटल-रिकॉर्ड, यात्रा दायरों व बैंक ट्रांज़ैक्शन सहित सभी संबंधित पहलुओं की गहन जांच शुरू कर दी है। जांच से जो भी निष्कर्ष निकलेंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई संभव है। 🔍
निष्कर्ष
शमशुल हुदा खां केस से स्पष्ट है कि व्यक्तिगत प्रवास और सरकारी सेवा के बीच पारदर्शिता कितनी आवश्यक है। जहां एक तरफ सुरक्षा एजेंसियों के कड़े सवाल हैं, वहीं प्रशासनिक प्रक्रियाओं में खामियों का भी संकेत मिलता है। इस मामले की जांच के परिणाम और आगे की कार्यवाही समाज और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
