आठवीं केंद्रीय वेतन आयोग का गठन: सरकारी कर्मचारियों के लिए नया युग
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों, सशस्त्र बलों, तथा अर्ध-न्यायिक संगठनों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों की गहन समीक्षा कर सिफारिशें देना है
आयोग की संरचना और प्रमुख सदस्य
सरकार द्वारा गठित इस आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजन प्रकाश देसाई होंगे। समितियों में प्रो. पुलक घोष (अंशकालिक सदस्य) और श्री संजय जैन (सदस्य-सचिव) शामिल हैं। आयोग का मुख्यालय दिल्ली में रहेगा[2].
आयोग के कार्य और उद्देश्य
- सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों – औद्योगिक, गैर-औद्योगिक और अखिल भारतीय सेवा सहित – के वेतन एवं भत्तों की संगठनात्मक, आर्थिक और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप समग्र समीक्षा[1].
- पेंशनधारकों, अर्धसैनिक बलों, रक्षा बलों सहित अन्य समकक्ष कर्मचारियों के लिए सामाजिक-सुरक्षा और वित्तीय मामलों में सिफारिशें तैयार करना।
- पुरानी और नई पेंशन स्कीम की समीक्षा तथा नए प्रणाली के अनुसार Death-cum-Retirement Gratuity की भी जांच।
- सेवा दायरे, कर्तव्यों, स्थायित्व, और अन्य शर्तों को ध्यान में रखते हुए संतुलित सुधार[1].
- राज्यों की आर्थिक स्थिति और केंद्र व राज्य संबंधी वित्तीय प्रभावों की गहन समीक्षा।
- केंद्रीय पब्लिक सेक्टर उपक्रम और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए वेतन संरचना एवं सेवा शर्तों का तुलनात्मक विश्लेषण।
सिफारिशें और समय सीमा
आयोग अपनी सिफारिशें गठन के 18 माह के भीतर सरकार को प्रस्तुत करेगा। आवश्यकता होने पर, आयोग प्रमुख मामलों पर अंतरिम रिपोर्ट भी दे सकता है, जिससे जनहित में त्वरित निर्णय लिए जा सकें[2].
आयोग के कार्य का महत्व
आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें न केवल करोड़ों सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनधारकों के जीवन को प्रभावित करेंगी, बल्कि देश की आर्थिक संरचना, सरकारी व्यय, और जनकल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी[1].
निष्कर्ष:
आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन से सरकारी कर्मचारियों को अपने वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद है। सरकार की यह पहल निश्चित रूप से देश के सरकारी तंत्र को अधिक सक्षम, पारदर्शी और कल्याणकारी बनाएगी
