⚖️ सवा दो करोड़ रिश्वत मांगने के आरोप में गोंडा के बीएसए और दो समन्वयक पर मुक़दमाको आदेश
भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने धारा के तहत केस दर्ज करने का निर्देश दिया — फर्नीचर सप्लाई टेंडर में कमीशन मांगने का गम्भीर आरोप। 📰
🗺️ मामला — गोंडा से
गोंडा की मोतीगंज क्षेत्र की कंपनी नीमन सीटिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के एमडी मनोज पांडेय ने गोरखपुर भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल कुमार तिवारी तथा जिला समन्वयक (जेम) प्रेमशंकर मिश्र और जिला समन्वयक (सिविल) विद्याभूषण मिश्र ने फर्नीचर आपूर्ति के ठेके में 15% कमीशन के रूप में कुल ₹2.25 करोड़ मांगें और पहले से ₹30 लाख अग्रिम लिए। 💸
🔍 आरोपों का सार
- कम्पनी को एल-1 (सबसे कम दर) घोषित किया गया था — 564 उच्च प्राथमिक व संकुल विद्यालयों के लिए फर्नीचर सप्लाई का टेंडर।
- आरोप है कि 4 जनवरी 2025 को बीएसए ने अपने सरकारी आवास पर बुलाकर ₹30,00,000 (जिसमें ₹22 लाख बीएसए को व प्रत्येक समन्वयक को ₹4 लाख) लिये।
- शेष रकम न देने पर फर्म को बाद में 2 वर्ष के लिये ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।
- आवेदक ने व्हाट्सएप चैट व अन्य साक्ष्यों को अदालत में प्रस्तुत किया। 📱
🔁 अधिकारियों का पक्ष
बीएसए व समन्वयकों ने अदालत में दावा किया कि कंपनी ने टेंडर में फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किये थे — अनुभव प्रमाणपत्र और टर्नओवर से जुड़ी सूचनाएँ ग़लत पाईं गईं। उदाहरण के तौर पर अनुभव प्रमाणपत्र में दर्शाई गई राशि ₹5.91 करोड़ के बजाय केवल ₹9.86 लाख थी, और 2022-23 का टर्नओवर भी विज्ञापित किए गए ₹19.54 करोड़ के बजाय वास्तविक ₹14.54 करोड़ था। इस आधार पर टेंडर निरस्त कर फर्म को ब्लैकलिस्ट किया गया, उनका कहना रहा।
⚖️ कोर्ट का निर्णय
विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विपिन कुमार तृतीय ने प्रारम्भिक जांच के बाद माना कि आवेदक के आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध हैं। इसलिए अदालत ने 31 अक्टूबर 2025 को आदेश पारित करते हुए कोतवाली नगर, गोंडा के प्रभारी निरीक्षक को तीनों अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुक़दमा दर्ज करने का निर्देश दिया। 👨⚖️
🔎 आगे की राह
अब पुलिस की जांच के बाद ही मामले की सच्चाई सामने आएगी — क्या मिलेगें और कितने प्रमाण साबित होंगे। कोर्ट के आदेश के बाद आरोपियों के विरुद्ध औपचारिक मुकदमाना दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया आरम्भ हो जाएगी।
📝 नोट:
यह मामला शैक्षिक संस्थानों के लिए लगने वाले सरकारी ठेके और सार्वजनिक धन के पारदर्शी उपयोग से जुड़ा है — इसलिए इसकी संवेदनशीलता काफी अधिक है। जनता और संबंधित हितधारकों के लिये निष्पक्ष और त्वरित जांच आवश्यक है।
