📰 : बच्चों की सेहत पर एनजीटी का ऐतिहासिक फैसला — देशभर के स्कूलों से हटेंगी जहरीली एस्बेस्टस शीटें 💨🚸

📰 शीर्षक: बच्चों की सेहत पर एनजीटी का ऐतिहासिक फैसला — देशभर के स्कूलों से हटेंगी जहरीली एस्बेस्टस शीटें 💨🚸

देश के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है।
अब सभी सरकारी और निजी स्कूलों को अपनी इमारतों की छतों से एस्बेस्टस शीट (Asbestos Sheets) को एक साल के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।

यह आदेश देशभर में पर्यावरण और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर लिया गया अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।


⚠️ क्या है एस्बेस्टस और क्यों है यह खतरनाक?

एस्बेस्टस एक ऐसी खनिज सामग्री है जिसका इस्तेमाल पुराने समय में छतों और दीवारों में सस्ती व जलरोधक चादर के रूप में किया जाता था।
लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसे घातक विष घोषित किया है क्योंकि इसके सूक्ष्म रेशे हवा में घुलकर फेफड़ों में जमा हो जाते हैं।

🔸 इससे फेफड़ों की गंभीर बीमारियाँ,
🔸 अस्थमा,
🔸 कैंसर (Mesothelioma)
जैसे जानलेवा रोग हो सकते हैं — और सबसे ज़्यादा असर बच्चों पर पड़ता है, जो लंबे समय तक ऐसे वातावरण में पढ़ते हैं।

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⚖️ एनजीटी का आदेश: एक साल में हटानी होंगी सभी शीटें

न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज़ अहमद की पीठ ने कहा –

“एस्बेस्टस शीट्स बच्चों के लिए घातक हैं, इसलिए इन्हें स्कूलों की छतों से हटाना अनिवार्य है।”

हालांकि, अगर किसी स्कूल की शीटें अभी अच्छी स्थिति में हैं, तो उन्हें फिलहाल हटाने की आवश्यकता नहीं है,
लेकिन उन पर पेंट या सुरक्षात्मक कोटिंग लगाना जरूरी होगा ताकि हानिकारक रेशे हवा में न फैलें।


🧰 कैसे हटाई जाएगी एस्बेस्टस शीट?

एनजीटी ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि –

✅ शीट खराब हो तो उसे गीला करके ही हटाया जाए, ताकि धूल उड़ न सके।
✅ हटाने का कार्य केवल प्रमाणित विशेषज्ञों द्वारा ही कराया जाए।
✅ हटाई गई शीट को सीलबंद कंटेनरों में पैक किया जाए।
✅ इसे केवल लाइसेंस प्राप्त खतरनाक अपशिष्ट निपटान स्थलों पर ही फेंका जाए।
✅ ऐसे कचरे को ले जाने वाले वाहनों पर स्पष्ट रूप से लिखा हो – “Asbestos Waste”


🏫 नियमित निरीक्षण करेंगे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

पीठ ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCBs) को आदेश दिया है कि वे –
🔹 स्कूलों का नियमित निरीक्षण करें,
🔹 हटाने की प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड रखें,
🔹 और यह सुनिश्चित करें कि कोई स्कूल फर्जी मरम्मत या आंशिक सफाई के नाम पर खतरे को न छिपाए।


🧑‍🏫 स्कूल कर्मियों को मिलेगा प्रशिक्षण

एनजीटी ने यह भी निर्देश दिया कि स्कूलों के शिक्षक, स्टाफ और कर्मियों को एस्बेस्टस से जुड़े जोखिमों और सुरक्षा उपायों का प्रशिक्षण दिया जाए,
ताकि वे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।


🧩 नीति बनेगी — देशभर में एस्बेस्टस पर प्रतिबंध की दिशा में कदम

एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को आदेश दिया है कि वे –
➡️ छह महीने के भीतर एस्बेस्टस से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्य और वैश्विक प्रथाओं की समीक्षा करें,
➡️ और स्कूलों, घरों व भवनों में इसके उपयोग को रोकने की राष्ट्रीय नीति तैयार करें।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट के 2011 के आदेश की अनदेखी!

एनजीटी ने यह भी माना कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2011 में एस्बेस्टस पर प्रतिबंध के बावजूद आज भी कई स्कूलों में इन शीटों का इस्तेमाल जारी है।
राज्यों ने इस दिशा में कोई ठोस योजना नहीं बनाई, और निगरानी प्रणाली बेहद कमजोर रही है।


🌱 सरकारी कलम की राय

“सरकारी कलम” का मानना है कि यह फैसला भारत के शिक्षा संस्थानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
यह सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा नहीं, बल्कि हमारे बच्चों की सांसों की हिफाज़त का भी आदेश है। 🌿

सरकार और स्कूल प्रशासन को अब इसे औपचारिकता नहीं, बल्कि मिशन मोड अभियान बनाकर लागू करना चाहिए।
क्योंकि बच्चों का भविष्य सिर्फ किताबों से नहीं, सुरक्षित वातावरण से भी बनता है। 📘💚


✍️ लेखक – सरकारी कलम टीम
📅 स्रोत: एनजीटी आदेश / पर्यावरण मंत्रालय / सीपीसीबी रिपोर्ट
🌐 www.sarkarikalam.com

🗣️ “स्कूल वो जगह है जहाँ बच्चे सपने देखते हैं — उनकी छत पर ज़हर नहीं होना चाहिए।” 🚫🏫


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