⚖️ बाल अपचारी की दोषसिद्धि सरकारी नौकरी में नहीं बनेगी बाधक — इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि बाल अपचारी (Juvenile) की दोषसिद्धि भविष्य में सरकारी नौकरी पाने में बाधा नहीं बन सकती। यदि किसी व्यक्ति ने नौकरी के लिए हलफनामा भरते समय बाल अपराध की जानकारी नहीं दी है, तो केवल इस आधार पर उसे सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता।
📌 कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाल अपराध का खुलासा करने के लिए दबाव डालना उसकी गोपनीयता और प्रतिष्ठा के खिलाफ है।
🧑🏫 शिक्षक को मिलेगा न्याय — सेवा में बहाली का आदेश
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति शैलेंद्र क्षितिज की खंडपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को निरस्त करते हुए याची शिक्षक को समस्त लाभों सहित सेवा में पुनः बहाल करने का निर्देश दिया है।
यह शिक्षक 2019 में PGT चयन के बाद जवाहर नवोदय विद्यालय, गौरीगंज (अमेठी) में नियुक्त हुआ था, लेकिन दो महीने बाद विभाग ने उसका आपराधिक इतिहास छिपाने का आरोप लगाकर सेवा समाप्त कर दी।
📌 किशोर न्याय अधिनियम का हवाला
कोर्ट ने स्पष्ट किया —
किशोर न्याय अधिनियम, 2000 की धारा 19(1) के अनुसार, यदि अपराध किशोर अवस्था में हुआ है और न्याय प्रक्रिया अधिनियम के अनुसार पूरी हो गई है, तो यह भविष्य में किसी सरकारी सेवा में बाधक नहीं होगा।
➡️ इसलिए दोषसिद्धि के बावजूद बाल अपराधी को सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता ✅
🚫 विभाग का तर्क खारिज
विभाग ने कहा कि:
- याची ने हलफनामे में आपराधिक इतिहास छिपाया
- 2015 अधिनियम लागू होने से उसे छूट नहीं मिल सकती
लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अपराध 2011 में हुआ था, जब किशोर न्याय अधिनियम 2000 प्रभावी था, इसलिए नया कानून इस मामले पर लागू नहीं होगा।
👮 पुलिस को FIR दर्ज कराने का आदेश देने का अधिकार नहीं — बाल कल्याण समिति
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में कहा कि बाल कल्याण समिति (CWC) के पास पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने का अधिकार नहीं है। वह केवल रिपोर्ट भेज सकती है।
जस्टिस चवन प्रकाश ने बदायूं के मामले में CWC द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए रद्द कर दिया।
➡️ अदालत ने स्पष्ट किया कि CWC कानून के दायरे में रहकर ही कार्य कर सकती है।
🔍 इस फैसले का व्यापक प्रभाव
✅ बाल अपचारी रहे युवाओं का भविष्य सुरक्षित
✅ सरकारी नौकरियों में अवसरों में बढ़ोतरी
✅ गोपनीयता और सम्मान के अधिकार की रक्षा
✅ विभागीय कार्यवाही में पारदर्शिता
निष्कर्ष : यह फैसला उन कई युवाओं के लिए राहत लेकर आया है, जो बचपन की भूलों के कारण अपना भविष्य खोने से डरते थे। अब उनका अधिकार और सम्मान दोनों सुरक्षित हैं।
⚖️ न्यायालय का यह निर्णय न्याय और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। 🙌
